अधिकारियों की साठगांठ से वर्षों से चल रहा बंदरबांट
फर्रुखाबाद: सुशासन और पारदर्शिता के दावों के बीच फर्रुखाबाद (Farrukhabad) जिले के विकासखंड कमालगंज से सरकारी धन (government money) के दुरुपयोग का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें नियमों को ताक पर रखकर पारिवारिक पेंशन और सरकारी नौकरी का एक साथ लाभ लिया जा रहा है। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों से मिलीभगत कर वर्षों से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
प्रकरण विकासखंड कमालगंज के ग्राम राजेपुर सराय मैदा निवासी गुड्डी बेगम पत्नी मोहम्मद रकीब से जुड़ा है, जो प्राथमिक विद्यालय नगला दाऊद में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात थीं। वर्ष 2012 में उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उनके पति मोहम्मद रकीब पुत्र स्वर्गीय मोहम्मद मुत्तकी ने पारिवारिक पेंशन लेना शुरू किया। इसी दौरान उनके पुत्र मोहम्मद राहिल को मृतक आश्रित कोटे में प्राथमिक विद्यालय निनोरा श्रंखलापुर में सेवक पद पर नियुक्ति मिली। वर्तमान में मोहम्मद राहिल बीआरसी कमालगंज से अटैच होकर बाबूगिरी का काम करता है, जिससे उसकी अधिकारियों से नजदीकी और कथित सेटिंग बनी हुई है।
मामले का सबसे अहम और चौंकाने वाला पहलू यह है कि 10 दिसंबर 2016 को मोहम्मद रकीब ने दूसरा निकाह कर लिया, इसके बावजूद वह आज तक पारिवारिक पेंशन ले रहा है। नियमों के अनुसार पुनर्विवाह के बाद पारिवारिक पेंशन का अधिकार समाप्त हो जाता है, लेकिन यहां खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। एक ओर पुत्र सरकारी नौकरी कर रहा है, दूसरी ओर पिता नियमविरुद्ध तरीके से पेंशन ले रहा है, जो सीधे तौर पर सरकारी धन का दुरुपयोग और विभाग के साथ धोखाधड़ी है।
ग्रामीणों के अनुसार इसी गांव के शहाबुद्दीन पुत्र स्वर्गीय बसी ने कई बार संबंधित अधिकारियों से लिखित और मौखिक शिकायतें कीं, लेकिन हर बार मामले को दबा दिया गया। आरोप है कि मोहम्मद राहिल की अधिकारियों से मजबूत सांठगांठ के चलते उसे हर जांच में क्लीन चिट मिलती रही और सरकारी धन का बंदरबांट बदस्तूर जारी रहा।
यूथ इंडिया की पड़ताल में मोहम्मद रकीब के दूसरे निकाह का विवाह प्रमाण पत्र भी सामने आया है, जिस पर निकाह पढ़ाने वाले मौलाना और गवाहों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। इतना ही नहीं, मौलाना कामिल हुसैन पुत्र ताहिर हुसैन ने शपथ पत्र देकर स्पष्ट किया है कि उनकी मौजूदगी में, कई गवाहों के सामने उन्होंने स्वयं यह निकाह पढ़ाया था।
आरोप है कि शपथ पत्र सामने आने के बाद से संबंधित दबंग लोग मौलाना को लगातार धमकियां दे रहे हैं, ताकि सच्चाई दबाई जा सके।ग्रामीणों ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गोपनीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि वास्तविक जांच कराई जाए तो वर्षों से चल रहा पूरा खेल उजागर हो जाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय जांच से कुछ नहीं होगा, क्योंकि वर्ष 2016 से अब तक संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी तक कथित रूप से हर महीने हिस्सा पहुंचाया जा रहा है। आरोप यहां तक हैं कि मौजूदा समय में खंड शिक्षा अधिकारी को 5,000 रुपये और बेसिक शिक्षा अधिकारी को 5,000 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं।
यह मामला न सिर्फ शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि योगीराज में भ्रष्टाचार पर लगाम के दावों की भी पोल खोलता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन-प्रशासन इस गंभीर आरोपों वाले प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।


