फर्रुखाबाद। पांचाल घाट स्थित गंगा तट पर माघ माह का पावन मेला श्रीराम नगरिया पूरे वैभव और आध्यात्मिक वातावरण के साथ सज चुका है। 3 जनवरी से प्रारंभ हुए इस ऐतिहासिक मेले में अब तक हजारों की संख्या में श्रद्धालु, कल्पवासी और साधु-संत पहुंच चुके हैं। गंगा स्नान, कल्पवास और धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर पूरे मेला क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना हुआ है।

मेले के साथ ही संतों के विभिन्न अखाड़ों में हवन-पूजन, धार्मिक अनुष्ठान एवं भंडारों का शुभारंभ हो गया है। दूर-दराज से आए श्रद्धालु संतों के सान्निध्य में धर्म, अध्यात्म और सेवा का लाभ ले रहे हैं।

इसी क्रम में अखिल भारतीय श्री पांच तेरह भाई त्यागी वैष्णव संप्रदाय अध्यक्ष संत समिति द्वारा अखाड़े में 21 फीट ऊंची धर्म ध्वजा की भव्य स्थापना की गई। इस वर्ष धर्म ध्वजा के साथ एक विशाल घंटा भी स्थापित किया गया है, जो पूरे मेला क्षेत्र में विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस घंटे को लगाने का मुख्य उद्देश्य अखाड़े और श्रद्धालुओं के बीच निरंतर चैतन्यता एवं जागरूकता बनाए रखना बताया गया है।

अखाड़े के महंत मोहनदास महाराज ने धर्म ध्वजा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि धर्म ध्वजा की स्थापना का अर्थ है कि अब अखाड़े के सभी सेवा कार्य औपचारिक रूप से प्रारंभ हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि माघ माह भर यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन-प्रसाद, आवास एवं सेवा की समुचित व्यवस्था की गई है, ताकि कोई भी भक्त असुविधा का शिकार न हो।

महंत मोहनदास महाराज ने बताया कि घंटे की स्थापना के पीछे भी एक विशेष उद्देश्य है। अखाड़े के कोतवाल को इसका प्रभारी नियुक्त किया गया है। प्रतिदिन प्रातः 4 बजे एक संत द्वारा घंटे का निनाद किया जाएगा, जिससे अखाड़े में ठहरे संतों एवं श्रद्धालुओं को जाग्रत किया जा सके। इसके अतिरिक्त दिनभर निश्चित अंतराल पर घंटे का नाद गूंजता रहेगा, जिससे पूरे अखाड़े एवं मेला क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा और चैतन्यता बनी रहे।

गंगा तट पर बहती शीतल हवा, संतों की वाणी, हवन की आहुतियां और घंटे की गूंज ने मेला श्रीराम नगरिया को एक दिव्य स्वरूप प्रदान कर दिया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस वर्ष मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि व्यवस्था और आध्यात्मिक वातावरण की दृष्टि से भी अत्यंत भव्य और अनुकरणीय बनता जा रहा है।

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