लखनऊ| उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रांतीय सम्मान समारोह में बिजली अभियंताओं ने संविधान की रक्षा और बिजली क्षेत्र के निजीकरण का पुरजोर विरोध करने का संकल्प लिया। समारोह में सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत करने और सरकारी नियंत्रण में ही बिजली के विकास पर जोर दिया गया। इस अवसर पर कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘ऊर्जा रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
अपने संबोधन में अवधेश कुमार वर्मा ने संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि बिजली जैसे मूलभूत क्षेत्र को हमेशा सार्वजनिक क्षेत्र में ही रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी ढांचे में ही बिजली का समग्र और समान विकास संभव है, जबकि निजीकरण से आम उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ता है और सामाजिक न्याय प्रभावित होता है।
समारोह में सेवा से निवृत्त हो चुके 27 वरिष्ठ अभियंताओं को उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए ‘अभियंता रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सभी सम्मानित अभियंताओं को अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया गया तथा उन्हें भारत के संविधान की प्रति भेंट की गई। कार्यक्रम के दौरान अभियंताओं ने एक स्वर में संविधान की रक्षा करने और बिजली क्षेत्र के निजीकरण के किसी भी प्रयास का विरोध करने का संकल्प दोहराया।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली व्यवस्था आम जनता से सीधे जुड़ी हुई है और इसे लाभ-हानि के तराजू पर नहीं तौला जा सकता। कार्यक्रम में मौजूद अभियंताओं ने स्पष्ट किया कि वे उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए एकजुट रहेंगे और सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को कमजोर नहीं होने देंगे।






