नई दिल्ली। दिल्ली दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों आरोपियों की भूमिका अन्य सह-आरोपियों से अलग और अधिक गंभीर है, इसलिए उन्हें राहत नहीं दी जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ UAPA (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत मुकदमा आगे चलता रहेगा। अदालत ने उनकी जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया उनके विरुद्ध दंगों की साजिश रचने से जुड़े आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में अन्य 7 आरोपियों में से 5 को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि इन आरोपियों की भूमिका सीमित थी और उनके विरुद्ध लगे आरोप उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे गंभीर नहीं हैं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि—
उमर खालिद और शरजील इमाम पर दंगों की पूर्व नियोजित साजिश में शामिल होने के आरोप हैं,
दोनों की भूमिका बाकी आरोपियों से अलग और अधिक प्रभावशाली मानी गई।
ऐसे मामलों में जमानत पर निर्णय लेते समय राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाती है।
गौरतलब है कि वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ UAPA के तहत केस दर्ज किया था। आरोप है कि दंगों के पीछे सुनियोजित साजिश थी, जिसमें कुछ आरोपियों की भूमिका प्रमुख बताई गई।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद उमर खालिद और शरजील इमाम को फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा, जबकि अन्य आरोपियों को जमानत पर रिहा किया जाएगा। मामले की आगे की सुनवाई निचली अदालत में जारी रहेगी।






