लखनऊ।पूर्व मुख्यमंत्री एवं पद्म विभूषण से सम्मानित कल्याण सिंह ‘बाबूजी’ की 94वीं जयंती के अवसर पर प्रदेशभर में उन्हें श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता के साथ स्मरण किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार, 05 जनवरी 2026 को लखनऊ स्थित 02, मॉल एवेन्यू में बाबूजी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा उनके ऐतिहासिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्व. कल्याण सिंह ‘बाबूजी’ का जीवन केवल एक राजनेता का जीवन नहीं था, बल्कि वह राष्ट्र, संस्कृति और जनभावनाओं के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि बाबूजी ने ऐसे कठिन दौर में उत्तर प्रदेश की कमान संभाली, जब एक ओर प्रदेश अराजकता, अस्थिरता और प्रशासनिक चुनौतियों से जूझ रहा था, वहीं दूसरी ओर सदियों से अपमान और गुलामी का दंश झेल रहा हिंदू समाज अपने आत्मसम्मान की पुनर्प्रतिष्ठा के लिए संघर्ष कर रहा था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबूजी का नेतृत्व साहसिक, स्पष्ट और दृढ़ संकल्प वाला था। उन्होंने जनभावनाओं की अनदेखी नहीं की, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रहकर निर्णय लेने का साहस दिखाया। यही कारण है कि उनका नाम भारतीय राजनीति के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्व. कल्याण सिंह ‘बाबूजी’ का कार्यकाल सुशासन, विकास, कानून व्यवस्था और राष्ट्रवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए सदैव याद किया जाएगा। उनके नेतृत्व में प्रशासनिक निर्णयों में दृढ़ता आई, शासन व्यवस्था में जवाबदेही स्थापित हुई और जनता में यह विश्वास जगा कि सरकार जनहित के साथ खड़ी है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बाबूजी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने सत्ता को कभी साधन नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम माना। उनका संपूर्ण जीवन समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, सम्मान और अवसर पहुंचाने के संकल्प को समर्पित रहा।
इस अवसर पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों ने भी स्व. कल्याण सिंह ‘बाबूजी’ की स्मृतियों को नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि बाबूजी ने अपने साहसिक निर्णयों, स्पष्ट दृष्टिकोण और राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने वाली सोच से उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति को दिशा दी।
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों ने एक स्वर में कहा कि श्रद्धेय कल्याण सिंह ‘बाबूजी’ का जीवन, संघर्ष और योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और उनका व्यक्तित्व भारतीय लोकतंत्र में मूल्यनिष्ठ राजनीति का आदर्श उदाहरण बना रहेगा।

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