उपेंद्र सागर
कहा जाता है कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है, लेकिन विडंबना यह है कि विकास की दौड़ में वही गांव आज सबसे ज़्यादा उपेक्षित नजर आते हैं। ऊंची इमारतों, एक्सप्रेसवे और स्मार्ट सिटी की चमक के पीछे ग्रामीण भारत का संघर्ष अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। आज भी देश का बड़ा हिस्सा बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, जर्जर भवन और संसाधनों का अभाव बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़े करता है। मजबूरी में अभिभावक बच्चों को दूर शहरों में भेजते हैं या फिर पढ़ाई छुड़वा देते हैं। इससे गांवों में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं की हालत भी बेहतर नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों और दवाओं की कमी आम बात है। गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीजों को शहरों की ओर भागना पड़ता है, जिससे समय, पैसा और कई बार जान तक चली जाती है। स्वास्थ्य सुविधाओं की यह कमी ग्रामीण जीवन को असुरक्षित बना देती है।
रोजगार की बात करें तो गांवों में अवसर बेहद सीमित हैं। खेती आज भी अधिकांश ग्रामीण आबादी की आजीविका का साधन है, लेकिन बढ़ती लागत, मौसम की मार और फसल का उचित मूल्य न मिलना किसानों को कर्ज के दलदल में धकेल रहा है। युवा वर्ग खेती छोड़कर शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर है।
इस पलायन का असर गांवों की सामाजिक संरचना पर साफ दिखाई देता है। खेत खाली हो रहे हैं, गांव बुजुर्गों और बच्चों तक सिमटते जा रहे हैं। युवा शक्ति का शहरों की ओर जाना न केवल गांवों को कमजोर करता है, बल्कि शहरों पर भी दबाव बढ़ाता है—झुग्गियां, बेरोजगारी और सामाजिक तनाव इसके परिणाम हैं।
सरकारी योजनाएं ग्रामीण विकास के लिए बनाई तो जाती हैं, लेकिन उनका ज़मीनी क्रियान्वयन अक्सर कमजोर रहता है। कागजों में सड़क, पानी और आवास दिख जाते हैं, लेकिन हकीकत में भ्रष्टाचार, लापरवाही और निगरानी की कमी के कारण लाभ सही लोगों तक नहीं पहुंच पाता।
ग्रामीण विकास केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि ईमानदार क्रियान्वयन से संभव है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर, कृषि में सुधार, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, ग्रामीण उद्योग और बेहतर शिक्षा-स्वास्थ्य ढांचा गांवों को फिर से मजबूत बना सकता है।
अगर गांव मजबूत होंगे, तभी देश का विकास संतुलित और टिकाऊ होगा। ग्रामीण भारत को नजरअंदाज कर कोई भी राष्ट्र आगे नहीं बढ़ सकता।
गांवों में निवेश दरअसल देश के भविष्य में निवेश है।




