लखनऊ| प्रदेश के बहराइच, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और बिजनौर सहित कई इलाकों में तेंदुओं के हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिससे इंसानों के साथ-साथ मवेशियों की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अकेले बिजनौर जिले में वर्ष 2025 में सितंबर तक तेंदुओं ने 30 लोगों पर हमला किया, जिनमें नौ लोगों की जान चली गई।
वन विभाग ने इन घटनाओं को लेकर शासन और वन मंत्री के समक्ष विस्तृत रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट में तेंदुओं के हमलों को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए उनकी 75 प्रतिशत आबादी की नसबंदी को आवश्यक बताया गया है। विभाग ने यह भी उल्लेख किया है कि महाराष्ट्र में इस तरह के उपाय को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर मंजूरी दी जा चुकी है।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि मौजूदा हालात बने रहे तो अकेले बिजनौर में अगले पांच वर्षों के भीतर तेंदुओं की संख्या तीन गुना से अधिक हो सकती है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 12(बीबी) के तहत प्रदेश के मुख्य वन्यजीव वार्डन को वैज्ञानिक प्रबंधन के उद्देश्य से किसी भी वन्यजीव की संख्या सीमित करने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि अनुसूची-1 में शामिल जानवरों के लिए केंद्र सरकार की अनुमति अनिवार्य है।
वन विभाग का आकलन है कि यदि बिजनौर में पांच वर्षों तक हर साल 10 प्रतिशत की दर से कुल 50 प्रतिशत तेंदुओं की नसबंदी की जाती है, तब भी उनकी संख्या 444 से बढ़कर 990 तक पहुंच जाएगी। इसी कारण विभाग ने 75 प्रतिशत तेंदुओं की नसबंदी (प्रति वर्ष 15 प्रतिशत) की सिफारिश की है। इससे पांच साल में उनकी संख्या लगभग 775 पर स्थिर हो सकती है और मानव मृत्यु व पशुधन हानि में 80 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है।
बिजनौर जिला राजाजी और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निकट स्थित है। इन क्षेत्रों में बाघों की संख्या बढ़ने के कारण तेंदुए गैर-वन क्षेत्रों, विशेष रूप से गन्ने के खेतों की ओर स्थानांतरित हो गए हैं। जिले के लगभग 49 प्रतिशत क्षेत्र में तेंदुओं को छिपने और प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण मिल रहा है। खेतों के आसपास पालतू पशुओं की उपलब्धता ने उनके लिए भोजन की समस्या लगभग समाप्त कर दी है, जिससे उनकी आबादी तेजी से बढ़ी है।
जिले के कुल 446 गांवों में से 326 गांव तेंदुओं की समस्या से प्रभावित हैं। इनमें 40 गांव अत्यंत संवेदनशील और 80 गांव संवेदनशील श्रेणी में रखे गए हैं। इसके साथ ही स्टाफ की कमी भी प्रबंधन में बड़ी चुनौती बनी हुई है। बिजनौर में वन कर्मियों की स्वीकृत संख्या 326 है, जबकि वर्तमान में केवल 163 कर्मी ही तैनात हैं।
वन विभाग के अनुसार, इस समय बिजनौर में लगभग 444 तेंदुए हैं, जिनमें 222 मादा हैं और 111 वयस्क हैं। मादा तेंदुए का प्रजनन चक्र लगभग दो वर्ष का होता है और एक बार में वह औसतन तीन शावकों को जन्म देती है। जिले में नर-मादा का अनुपात भी तेंदुओं की तेजी से बढ़ती आबादी की ओर इशारा कर रहा है। ऐसे में वन विभाग की नसबंदी संबंधी सिफारिशों को जल्द लागू करना समय की मांग माना जा रहा है।






