फर्रुखाबाद| हाल ही में दिल्ली जा रही हरदोई डिपो की रोडवेज बस से तीन अवैध शस्त्र बरामद होने की घटना ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी। लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है अगर सरकारी बस में शस्त्र बरामद हो रहे हैं, तो प्राइवेट बस सर्विस, खासकर अभय ट्रैवल्स जैसी बसों की हालत क्या होगी। स्थानीय जांच में यह सामने आया है कि अभय ट्रैवल्स का नेटवर्क कानून और सुरक्षा नियमों की खुलेआम अवहेलना कर रहा है।
अभय ट्रैवल्स के मालिक पंकज मिश्रा ने कम ही समय में अपने नेटवर्क को इतना बड़ा और संगठित बना लिया है कि यह अब सिर्फ बस सेवा नहीं, बल्कि अवैध कारोबार और तस्करी का केंद्र बन चुका है। ये बसें बिना जीएसटी, बिना फिटनेस, बिना टैक्स और बिना परमिट के चल रही हैं। यात्रियों की संख्या नियमों के विपरीत खचाखच भरी जाती है और सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं होता। इन बसों में न केवल अवैध शस्त्र, बल्कि बिना बिल के तंबाकू और प्रतिबंधित दवाइयों की तस्करी भी होती है। रोजाना 8 से 12 पैकेट तंबाकू इन बसों में भेजे जाते हैं और वापसी में नशीली दवाइयों की खेप लाई जाती है। यह नेटवर्क इतना संगठित है कि बसें अब ‘चलती तस्करी मशीन’ बन चुकी हैं।
नाम न उजागर करने की शर्त पर एक चालक ने बताया कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर महीने थानों को 4,000 रुपये, पुलिस चौकियों को 2,000 रुपये और ARTO को 9,000 रुपये प्रति बस देने की व्यवस्था है। यही रकम इस अवैध साम्राज्य की सुरक्षा कवच बन चुकी है, जिससे अधिकारी बसों को रोकने या जांचने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। सड़क पर दौड़ती ये बसें अब कानून की नहीं, बल्कि ‘महीने की सेटिंग’ की गुलाम बन चुकी हैं।
स्थानीय लोग इस अवैध तस्करी और बस नेटवर्क से भयभीत हैं। उनका कहना है कि कम ही समय में अभय ट्रैवल्स इतना बड़ा और संगठित नेटवर्क कैसे बना पाया, यह प्रशासन के लिए गंभीर सवाल है। यह नेटवर्क सिर्फ बस संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र में अवैध कारोबार और तस्करी के लिए आधार बन चुका है।
थानाध्यक्ष सुदेश कुमार विश्वकर्मा ने रोडवेज बस की शस्त्र बरामदगी की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जांच जारी है, लेकिन प्राइवेट बसों के इस बड़े नेटवर्क की जांच और नियंत्रण अभी चुनौती है। सीओ अमृतपुर संजय वर्मा ने भी कहा कि अभय ट्रैवल्स जैसी बस सर्विस पर निगरानी बढ़ाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
फर्रुखाबाद में यह मामला स्पष्ट करता है कि केवल सरकारी बसों की जांच पर्याप्त नहीं है। अभय ट्रैवल्स जैसे प्राइवेट बस ऑपरेटरों का काला खेल रोकना अब प्रशासन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुका है, अन्यथा सड़कें अपराध और तस्करी का अड्डा बन जाएंगी। स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि बसों और तस्करी नेटवर्क पर तत्काल और कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि कानून, सुरक्षा और जनहित के साथ खिलवाड़ बंद हो।

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