लखनऊ। वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को प्राथमिकता देते हुए सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने लखनऊ में प्रस्तावित नाइट सफारी परियोजना को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है, लेकिन इस अनुमति के साथ कई कड़ी शर्तें भी तय की गई हैं। सीईसी ने स्पष्ट किया है कि परियोजना तभी आगे बढ़ सकेगी, जब पर्यावरणीय और प्रशासनिक नियमों का पूरी सख्ती से पालन किया जाएगा।
सीईसी ने नाइट सफारी में प्रस्तावित एडवेंचर जोन को पूरी तरह रद्द कर दिया है। समिति का कहना है कि आरक्षित वन भूमि का उपयोग गैर-वानिकी और मनोरंजन गतिविधियों के लिए नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही परियोजना क्षेत्र में चार लेन सड़क बनाने के प्रस्ताव पर भी रोक लगा दी गई है। अब यहां केवल दो लेन की सड़क ही बनाई जा सकेगी, वह भी संरक्षण-अनुकूल स्वरूप में।
नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को भी सीईसी ने अनुचित ठहराया है। समिति का मानना है कि मौजूदा 72 एकड़ क्षेत्र में ही चिड़ियाघर का आधुनिकीकरण संभव है और इसे लखनऊ के प्रमुख ‘ग्रीन लंग’ के रूप में संरक्षित रखा जाना चाहिए। हालांकि सरकार चाहे तो अलग स्थान पर नया चिड़ियाघर विकसित कर सकती है, लेकिन वर्तमान चिड़ियाघर को हटाया नहीं जाना चाहिए।
कुकरैल वन क्षेत्र आरक्षित वन होने के कारण नाइट सफारी के निर्माण से पहले सुप्रीम कोर्ट की अनुमति आवश्यक थी। इसी क्रम में शीर्ष अदालत ने पर्यावरणीय प्रभावों की जांच के लिए सीईसी को निर्देश दिए थे। सीईसी ने करीब 310 पेज की विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी है, जिसमें कहा गया है कि परियोजना को पहले ही केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) की स्वीकृति मिल चुकी है, इसलिए इसे सशर्त आगे बढ़ने दिया जा सकता है।
रिपोर्ट में साफ किया गया है कि नाइट सफारी का डिजाइन, निर्माण और संचालन पूरी तरह सीजेडए के दिशा-निर्देशों के अनुसार होगा। इसके अलावा एक विशेष पर्यावरणीय निगरानी समिति गठित की जाएगी, जिसमें वन्यजीव विशेषज्ञ, सीजेडए के प्रतिनिधि और राज्य वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति हर महीने निरीक्षण करेगी और प्रत्येक तीन महीने में राज्य सरकार, सीजेडए और सीईसी को रिपोर्ट सौंपेगी।
सीईसी ने पेड़ कटान, तेज रोशनी और शोर-शराबे पर भी सख्त नियंत्रण के निर्देश दिए हैं। नाइट सफारी में ‘लो-इंटेंसिटी’ और ‘एनिमल-फ्रेंडली’ लाइटिंग, नियंत्रित वाहन आवाजाही और सीमित समय में प्रवेश जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य होंगी। प्राकृतिक नालों, जलधाराओं और आर्द्रभूमि से किसी भी तरह की छेड़छाड़ की अनुमति नहीं होगी।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि सीईसी द्वारा एडवेंचर जोन पर रोक और मौजूदा चिड़ियाघर को स्थानांतरित न करने जैसी शर्तें सरकार को स्वीकार हैं। सुप्रीम कोर्ट से अंतिम अनुमति मिलते ही नाइट सफारी परियोजना का काम शुरू कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि करीब 1510 करोड़ रुपये की लागत से 855 एकड़ क्षेत्र में कुकरैल नाइट सफारी और चिड़ियाघर विकसित करने की योजना है, जिसमें लगभग 71 प्रतिशत क्षेत्र हरियाली के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। यह देश की पहली और विश्व की पांचवीं नाइट सफारी होगी।

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