
– गिरफ्तारी से बचने की चाल पर HC सख्त, 12 जनवरी को अगली सुनवाई
– गिरफ़्तारी होगी तो पुलिस को बताना होगा ठोस कारण
प्रयागराज। शातिर अपराधी अवधेश मिश्रा को उच्च न्यायालय इलाहाबाद से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। गिरफ्तारी से बचने के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय की डबल बेंच ने स्पष्ट कर दिया कि पुलिस कानून के दायरे में रहते हुए कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। यदि गिरफ्तारी हुई तो पुलिस को ठोस कारण स्पष्ट करना होगा।
अवधेश मिश्रा ने अदालत में यह मांग की थी कि उसकी सीधी गिरफ्तारी न की जाए, और जिला जज की पूर्व अनुमति के बाद ही पुलिस कोई कदम उठाए। न्यायालय ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। गौरतलब है कि भारतीय संविधान व दंड प्रक्रिया के तहत जब किसी अभियुक्त के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत हो और वह गिरफ्तारी-योग्य हो, तो पुलिस गिरफ्तारी के कारण स्पष्ट करती है और संबंधित न्यायालय को सूचित करती है—यही स्थापित प्रक्रिया है।
अदालत के संज्ञान में यह तथ्य भी आया कि अवधेश मिश्रा पर करीब 10 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। आरोप है कि वह फर्जी गैंगरेप जैसी संगीन धाराओं में केस दर्ज कराकर भोले-भाले लोगों से मोटी उगाही करने का आदी रहा है। एक मामले में पुलिस उसकी प्रयागराज में गिरफ्तारी भी कर चुकी है।
बताया गया कि अवधेश मिश्रा ने पहले भी अदालत को गुमराह कर अस्थायी स्थगन आदेश हासिल किया और उसी के बलबूते बाहर रहकर कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियां जारी रखीं। आरोप है कि वह माफिया नेटवर्क के लिए भी काम करता रहा है और अनुपम दुबे के गैंग का खुलेआम संचालन कर रहा है।
काली कमाई से करोड़ों की संपत्ति
याचिका में यह भी सामने आया कि अवधेश मिश्रा ने चंद वर्षों में काली कमाई से करोड़ों की संपत्ति खड़ी की है और उसी आर्थिक ताकत के दम पर बार-बार नई याचिकाएं दाखिल कर न्यायिक प्रक्रिया को भ्रमित करने की कोशिश करता रहा है।
अगली सुनवाई 12 जनवरी
उच्च न्यायालय ने फिलहाल कोई राहत न देते हुए मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी तय की है। अदालत का रुख संकेत देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं, और गिरफ्तारी से बचने के लिए बनाई गई कानूनी चालों पर अब सख्ती तय है।






