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Wednesday, February 18, 2026

भारत-पाक मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का दावा देश का अपमान, केंद्र सरकार करे सख्त खंडन: ओवैसी

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हैदराबाद| भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और संघर्ष को लेकर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावों पर सियासत तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन की ओर से किए गए दावों को बेबुनियाद बताते हुए केंद्र सरकार से सख्त रुख अपनाने की मांग की है। ओवैसी ने कहा कि भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि भारत-पाकिस्तान से जुड़े मामलों में किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के लिए कोई जगह नहीं है, इसके बावजूद ऐसे दावे भारत के सम्मान और संप्रभुता पर सवाल खड़े करते हैं।
असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर युद्धविराम कराने और व्यापार प्रतिबंधों के जरिए शांति स्थापित करने जैसे दावे कर चुके हैं। अब चीन के विदेश मंत्री की ओर से मध्यस्थता का दावा सामने आना और भी गंभीर है। उन्होंने कहा कि यह भारत का खुला अपमान है और केंद्र सरकार को इसका आधिकारिक व कड़ा खंडन करना चाहिए। ओवैसी ने साफ शब्दों में कहा कि चीन के साथ संबंधों में किसी भी तरह की सामान्य स्थिति भारत के सम्मान या उसकी संप्रभुता की कीमत पर नहीं हो सकती।
ओवैसी ने केंद्र सरकार से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या प्रधानमंत्री की चीन यात्रा के दौरान मोदी सरकार ने ऐसी किसी बात पर सहमति जताई थी, जिसकी वजह से अब चीन भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता का दावा कर रहा है। उन्होंने कहा कि चीनी विदेश मंत्री का यह बयान न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि भारत की घोषित विदेश नीति के भी खिलाफ है। केंद्र सरकार को देश को भरोसा दिलाना चाहिए कि किसी भी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया कि चीन दक्षिण एशिया में खुद को प्रभावशाली ताकत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है और इसी रणनीति के तहत भारत और पाकिस्तान को एक ही स्तर पर रखकर देखना चाहता है। गौरतलब है कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव उन ‘गर्म मुद्दों’ में शामिल था, जिन पर चीन ने इस वर्ष मध्यस्थता की भूमिका निभाई है।
हालांकि, पहलगाम आतंकी हमले के बाद 7 से 10 मई के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीमित सैन्य संघर्ष को लेकर भारत सरकार का रुख शुरू से स्पष्ट रहा है। नई दिल्ली ने साफ कहा है कि तनाव कम करने और समाधान का रास्ता दोनों देशों के सैन्य अभियानों के महानिदेशकों (DGMO) के बीच सीधी बातचीत से निकला था, न कि किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से। ऐसे में ओवैसी के बयान के बाद केंद्र सरकार पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थिति स्पष्ट करने और भारत की संप्रभु नीति को दोहराने का दबाव और बढ़ गया है।

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