भाजपा की मजबूत सीटों पर सबसे बड़ा असर
मेरठ। विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मेरठ जिले की मतदाता सूची में बड़ा उलटफेर सामने आया है। जिले में कुल 6.63 लाख मतदाता SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से गायब हो गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह कमी उन विधानसभा क्षेत्रों में अधिक दर्ज की गई है, जिन्हें लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी की मजबूत सीटें माना जाता रहा है। नए आंकड़ों के सामने आने के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के अनुसार मेरठ कैंट विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 1,53,172 वोटर SIR के दौरान सूची से बाहर हो गए हैं। इसी तरह मेरठ दक्षिण विधानसभा में 1,52,997 मतदाता गायब पाए गए हैं। ये दोनों ही सीटें भाजपा का गढ़ मानी जाती हैं। कैंट विधानसभा पर वर्ष 1989 से लगातार भाजपा का कब्जा रहा है और यहां पार्टी का मजबूत जनाधार माना जाता रहा है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में वोटरों का नाम कटना राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
ग्रामीण और आरक्षित क्षेत्रों में भी वोटरों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र में करीब साढ़े 63 हजार मतदाता SIR के बाद सूची से बाहर हो गए हैं। वहीं सिवालखास में 65,527 और किठौर विधानसभा क्षेत्र में 62,930 वोटरों की कमी दर्ज की गई है। इन आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का असर जिले की लगभग सभी विधानसभा सीटों पर पड़ा है।
SIR प्रक्रिया के बाद अब मेरठ जिले में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर करीब 20.35 लाख रह गई है। निर्वाचन विभाग का कहना है कि मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अपात्र मतदाताओं के नाम हटाने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया गया था। हालांकि, विपक्षी दलों का आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में वोटरों के नाम कटना गंभीर सवाल खड़े करता है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
फिलहाल ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक दल और आम मतदाता दोनों ही सतर्क नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मेरठ में मतदाता सूची का मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है और इसका असर आगामी चुनावी समीकरणों पर भी साफ तौर पर दिखाई






