लखनऊ| आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में सामने आए बड़े फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद अब इस मामले में जांच और कार्रवाई और तेज कर दी गई है। 24 दिसंबर की रात लखनऊ के गोमतीनगर विस्तार क्षेत्र से मास्टरमाइंड समेत सात आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद 26 दिसंबर को यह साफ हो गया है कि यह संगठित गिरोह केवल बाहरी लोगों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसकी जड़ें सरकारी व्यवस्था तक फैली हुई थीं। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की जांच में योजना से जुड़े वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका सामने आई है, जिन पर जल्द कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
एसटीएफ सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच शुरू हो चुकी है। जांच में अब तक यह सामने आया है कि गिरोह ने करीब दो हजार से अधिक अपात्र लोगों के फर्जी आयुष्मान कार्ड बनवाए। इन कार्डों के जरिए निजी और सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराया गया, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पात्र परिवारों की फैमिली आईडी में ओटीपी प्रक्रिया को दरकिनार कर अपात्र लोगों को सदस्य के रूप में जोड़ते थे। इसके बाद योजना के क्रियान्वयन और राज्य स्वास्थ्य एजेंसी में तैनात अपने संपर्कों के जरिए फर्जी तरीके से कार्डों को मंजूरी दिलवाई जाती थी। प्रत्येक कार्ड के बदले करीब छह हजार रुपये वसूले जाते थे, जिसमें से एक बड़ी रकम संबंधित कर्मचारियों को दी जाती थी।
छापेमारी के दौरान एसटीएफ को बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री मिली है। इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल फाइलें, एटीएम कार्ड, आधार और पैन कार्ड, चेकबुक, नकदी और वाहन शामिल हैं। इन सबूतों से यह स्पष्ट हो रहा है कि यह फर्जीवाड़ा लंबे समय से योजनाबद्ध तरीके से चल रहा था। बरामद डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर कई और लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि योजना से जुड़े जिन कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, उन्हें पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर आगे और गिरफ्तारियां भी की जाएंगी। इस मामले में लखनऊ के साइबर अपराध थाने में दर्ज मुकदमे के तहत संबंधित धाराओं में विधिक कार्रवाई जारी है।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने भी इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए आयुष्मान योजना के तहत जारी सभी कार्डों की दोबारा जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ केवल पात्र लाभार्थियों तक ही पहुंचे। आयुष्मान योजना में सामने आया यह फर्जीवाड़ा न केवल सिस्टम की खामियों को उजागर करता है, बल्कि सरकारी योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

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