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Friday, February 27, 2026

पैसा कमाने का मकसद सही नहीं होगा तो पैसा कभी टिकेगा नहीं

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यूथ इंडिया

पैसा कमाना हर इंसान की ज़रूरत है, लेकिन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है यह समझना कि पैसा किस मकसद से कमाया जा रहा है। अगर पैसा कमाने के पीछे सोच केवल भोग-विलास, दिखावा और तात्कालिक सुख है, तो वह पैसा ज़्यादा दिन टिक ही नहीं सकता। यह बात केवल अनुभव की नहीं, बल्कि मनोविज्ञान और विज्ञान की सच्चाई है।

सीधी भाषा में कहें तो पैसा उतना नहीं भागता, जितना हमारा दिमाग उसे उड़ाता है।

पैसा जब उद्देश्य के साथ कमाया जाता है — जैसे जीवन की सुरक्षा, परिवार की ज़िम्मेदारी, भविष्य की स्थिरता और आत्मनिर्भरता — तब इंसान सोच-समझकर फैसले लेता है। ऐसे समय में दिमाग का वह हिस्सा सक्रिय रहता है जो योजना बनाता है, जोखिम समझता है और भावनाओं पर नियंत्रण रखता है। यही वजह है कि उद्देश्य वाला पैसा धीरे-धीरे बढ़ता है और लंबे समय तक साथ देता है।

इसके उलट, जब पैसा केवल मौज-मस्ती, ऐश और दिखावे के लिए कमाया जाता है, तब दिमाग तुरंत सुख देने वाली चीज़ों की तरफ भागता है। महंगी चीज़ें खरीदना, लोगों को प्रभावित करना, सोशल मीडिया पर बेहतर दिखना — यह सब दिमाग में तुरंत खुशी पैदा करता है। लेकिन यह खुशी बहुत छोटी होती है। विज्ञान बताता है कि बार-बार ऐसी खुशी लेने से दिमाग उसी स्तर की संतुष्टि पाने के लिए और ज़्यादा खर्च करवाने लगता है। यही वजह है कि भोग-विलास की आदत बढ़ती जाती है और पैसा तेजी से खत्म होता है।

भोग-विलास की सोच इंसान को “आज जी लो, कल देखा जाएगा” वाली मानसिकता में ले जाती है। इससे बजट टूटता है, कर्ज़ लेना सामान्य लगने लगता है और बचत बोझ लगने लगती है। यही कारण है कि अचानक पैसा कमाने वाले, लॉटरी जीतने वाले या शॉर्टकट से अमीर बने लोग कुछ ही समय में फिर आर्थिक परेशानी में फंस जाते हैं।

एक बड़ी वजह यह भी है कि जब पैसा पहचान और अहंकार से जुड़ जाता है, तो वह टिक नहीं पाता। आदमी पैसा अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए नहीं, बल्कि दूसरों से बेहतर दिखने के लिए खर्च करने लगता है। पहचान की भूख कभी खत्म नहीं होती, इसलिए खर्च भी कभी रुकता नहीं।

विज्ञान साफ कहता है कि जिन लोगों का पैसा कमाने का उद्देश्य स्पष्ट होता है, वे भावनाओं में बहकर खर्च नहीं करते। वे तात्कालिक सुख को टाल सकते हैं और सही समय पर सही जगह पैसा लगाते हैं। ऐसे लोगों की आमदनी भले सामान्य हो, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति समय के साथ मजबूत होती जाती है।

पैसा कमाने से ज़्यादा ज़रूरी है यह समझना कि पैसा क्यों कमाया जा रहा है। भोग-विलास की इच्छा पैसा खत्म नहीं करती, बल्कि अस्थिर मन पैसा खत्म करता है। जो पैसा सोच, संयम और उद्देश्य के साथ कमाया जाता है, वही पैसा जीवन में स्थिरता, सम्मान और आज़ादी देता है।

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