बिल्डर–प्रशासन की भूमिका सवालों में
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के रामपुर बेहड़ा क्षेत्र में सरकारी तालाब और चकमार्ग पर अवैध निर्माण का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि बिल्डर हरीश सिंह ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर निर्माण कार्य शुरू कराया, जबकि स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी इस पूरे प्रकरण में सवालों के घेरे में है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि गांव की सरकारी तालाब की जमीन और चकमार्ग पर पक्के निर्माण कराए जा रहे हैं, जिससे न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि ग्रामीणों के आवागमन का रास्ता भी बाधित हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध निर्माण बिना बीकेटी तहसील प्रशासन और संबंधित लेखपाल की मिलीभगत के संभव नहीं है। आरोप है कि शिकायतों के बावजूद न तो निर्माण रुकवाया गया और न ही समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई की गई।
पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल
मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने बिल्डर हरीश सिंह को मौके से पकड़ा, लेकिन आरोप है कि महज 30 मिनट के भीतर उसे छोड़ दिया गया। इस कार्रवाई के बाद पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण अवैध नहीं था, तो हिरासत में क्यों लिया गया और यदि अवैध था, तो इतनी जल्दी छोड़ क्यों दिया गया।
मामले से नाराज ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री से बिल्डर और संबंधित अफसरों के खिलाफ शिकायत की है। शिकायत में मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अवैध निर्माण को तत्काल ध्वस्त किया जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
अब तक इस मामले में तहसील प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। न ही यह साफ किया गया है कि सरकारी तालाब और चकमार्ग की भूमि पर निर्माण किस आधार पर हो रहा था।
यह मामला एक बार फिर सरकारी जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जों और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि मुख्यमंत्री कार्यालय से शिकायत के बाद इस प्रकरण में क्या ठोस कार्रवाई होती है।





