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Monday, February 9, 2026

पांचाल घाट की संदिग्ध ट्रेनिंग, बम बरामदगी और सियासी संरक्षण की परतें आज भी अंसुलझी

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फर्रुखाबाद: समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान जनपद फर्रुखाबाद (Farrukhabad) के पांचाल घाट (Panchal Ghat) क्षेत्र में एक संदिग्ध ट्रेनिंग का संचालन किया जा रहा था। सूत्रों के अनुसार, इस ट्रेनिंग में गैर प्रांतों से आए करीब 10 हजार युवक शामिल थे। ट्रेनिंग का स्वरूप सामान्य नहीं था, जिसको लेकर उस समय सुरक्षा एजेंसियों (security agencies) की चिंता भी बढ़ी थी।

इसी दौरान फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन जंक्शन और पांचाल घाट क्षेत्र से बम बरामद होने की घटनाएं सामने आई थीं। बम मिलने के बाद मामला गंभीर हुआ और उच्च स्तरीय जांच शुरू की गई। जांच की जिम्मेदारी आगे बढ़ते हुए मिलिट्री इंटेलिजेंस तक पहुंची, जहां तकनीकी स्तर पर पूरे नेटवर्क की पड़ताल की गई।

जांच की आंच तेज होते ही यह संदिग्ध ट्रेनिंग धीरे-धीरे जनपद से हटा ली गई, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि ट्रेनिंग संचालित करने वाले लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सूत्रों का दावा है कि उस समय इन्हें सपा सरकार का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था।

बताया जाता है कि इस पूरे नेटवर्क में पड़ोसी जनपद का एक सपा विधायक,उसके करीबी लोग, और कई नॉन प्रैक्टिसनर वकील शामिल थे। सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों के पास 2010 से 2012 के बीच खुद का मकान तक नहीं था, उन्होंने इसी नेटवर्क के सहारे फर्रुखाबाद,कानपुर,आगरा सहित प्रदेश के कई जिलों में करोड़ों रुपये की नामी और बेनामी संपत्तियां खड़ी कर लीं।

प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के सत्ता में आने के बाद माफियाओं और संगठित अपराध पर सख्ती हुई। इस दौरान इस नेटवर्क से जुड़े कई बड़े नाम माफिया घोषित किए गए, कई लोगों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई भी हुई।

हालांकि सूत्रों का कहना है कि इन गिरोहों के कुछ हिस्से आज भी सक्रिय हैं। बचे हुए शातिर अपराधियों पर कार्रवाई इसलिए आगे नहीं बढ़ सकी, क्योंकि मोटा पैसा कुछ जिम्मेदार लोगों तक भी पहुंचता रहा, जिससे उन्हें संरक्षण मिलता रहा। सूत्रों का यह भी कहना है कि अब वही तत्व योगी सरकार की छवि को खराब करने के लिए सुनियोजित रणनीति पर काम कर रहे हैं।

यदि इस पूरे मामले की गहराई से निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो कई ऐसे नाम सामने आ सकते हैं, जिनके तार राजनीति, अवैध संपत्ति और संगठित अपराध से जुड़े हैं। पांचाल घाट की यह कहानी आज भी कई सवाल छोड़ जाती है। अब देखना यह है कि क्या कभी इस पूरे नेटवर्क की सच्चाई जनता के सामने आ पाएगी या यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

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