लखनऊl प्रदेश में पशुपालकों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। इंसानों की तरह अब पशुओं को भी सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए प्रदेश के प्रत्येक ब्लॉक में पशु जन औषधि केंद्र खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे पशुओं का इलाज कम खर्च में संभव हो सकेगा।
प्रदेश सरकार की इस पहल के तहत ब्लॉकों में खुलने वाले पशु जन औषधि केंद्रों पर एंटीबायोटिक्स, टीके, डी-वॉर्मिंग दवाएं, विटामिन सहित अन्य आवश्यक दवाएं उपलब्ध होंगी। अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को मिलने वाली जेनेरिक दवाओं की तर्ज पर अब पशुपालकों को भी उचित दरों पर दवाएं मिलेंगी। पूरे प्रदेश में इन केंद्रों की स्थापना के लिए प्रत्येक जिले के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) कार्यालय में एक नोडल अधिकारी तैनात किया गया है, जो आवेदकों को आवेदन प्रक्रिया, दस्तावेजों की जांच और शंकाओं के समाधान में मदद करेंगे।
जिला स्तर पर आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रकरण को पोर्टल के माध्यम से प्रदेश स्तर पर भेजा जाएगा। अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद पशु जन औषधि केंद्रों का संचालन शुरू हो जाएगा। राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी डॉ. विवेकानंद के अनुसार, इसके लिए पोर्टल शुरू हो चुका है। पशु जन औषधि केंद्रों का संचालन सहकारी समिति और पीएम कृषक समृद्धि केंद्र के सदस्य ही कर सकेंगे। आवेदन के लिए फार्मासिस्ट पंजीकरण प्रमाणपत्र और ड्रग लाइसेंस अनिवार्य होगा। कई जिलों से आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनका सत्यापन सीवीओ कार्यालयों में किया जा रहा है।
पशु चिकित्सक डॉ. पंकज गुप्ता का कहना है कि बाजार में पशुओं की दवाएं काफी महंगी होती हैं और कई बार नकली दवाएं भी मिल जाती हैं, जिससे पशुपालक समय पर इलाज नहीं करा पाते। जेनेरिक दवाएं सस्ती होने के कारण पशुओं का समय से उपचार संभव होगा और इससे पशुधन के स्वास्थ्य में भी सुधार आएगा।
प्रदेश में वर्तमान में 2202 पशु चिकित्सालय, 267 पशु औषधालय और 2575 पशुधन सेवा केंद्र संचालित हैं, जबकि पशुओं की संख्या करीब 6.78 करोड़ है। पशु जन औषधि केंद्र खुलने से पशुपालकों को सीधा लाभ मिलेगा और पशुधन विकास को नई गति मिलेगी।





