रामानुज
जीवन और कैरियर का सबसे बड़ा सच यही है कि जो सीखना बंद कर देता है, उसका आगे बढ़ना भी उसी क्षण रुक जाता है। समय ठहरता नहीं है और जो व्यक्ति समय के साथ खुद को नहीं बदलता, वह धीरे-धीरे पीछे छूट जाता है। सीखना केवल किताबों तक सीमित नहीं होता, यह अनुभव, असफलताओं और परिस्थितियों से भी होता है।
आज का दौर प्रतिस्पर्धा का है। यहां टिके रहने के लिए हर दिन कुछ नया सीखना जरूरी हो गया है। जो व्यक्ति यह मान लेता है कि उसने सब कुछ सीख लिया, वही व्यक्ति अपने पतन की शुरुआत कर देता है।
एक और कड़वी सच्चाई यह है कि जो व्यक्ति कई नावों पर पैर रखने की कोशिश करता है, उसका डूबना तय होता है। जीवन में अवसर बहुत आते हैं, लेकिन हर अवसर को पकड़ने की कोशिश दिशा को कमजोर कर देती है। कभी इधर, कभी उधर भटकने वाला व्यक्ति न तो किसी एक क्षेत्र में महारत हासिल कर पाता है, न ही स्थायित्व।
कई लोग आज सब कुछ एक साथ पाना चाहते हैं—नाम भी, पैसा भी, पहचान भी—लेकिन यह भूल जाते हैं कि सफलता एक रास्ते पर लगातार चलने से मिलती है, न कि हर रास्ते पर कदम रखने से।
एक दिशा में चलने वाला ही एक दिन मंजिल पाता है।
स्पष्ट लक्ष्य इंसान को मजबूती देता है। जब लक्ष्य साफ होता है, तो रास्ते की कठिनाइयां भी सीख बन जाती हैं। तब असफलता डर नहीं बनती, बल्कि अनुभव बन जाती है।
सफल लोग वही होते हैं जो सीमित विकल्पों में भी पूरे मन से काम करते हैं। वे जानते हैं कि ऊर्जा बिखरने से ताकत कम होती है, जबकि फोकस उसे कई गुना बढ़ा देता है।
सीखते रहना और एक दिशा में बढ़ते रहना—यही सफलता का असली सूत्र है। सीख बिना दिशा के भटकाव है और दिशा बिना सीख के ठहराव। जब दोनों साथ चलते हैं, तभी प्रगति संभव होती है।
जो सीखना छोड़ देता है, वह समय से हार जाता है।
जो कई नावों पर सवार होता है, वह मंजिल से पहले ही डूब जाता है।
और जो एक दिशा में पूरे विश्वास के साथ आगे बढ़ता है, वही अंततः सफलता के शिखर तक पहुंचता है।


