नई दिल्ली| भारतीय विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों और पायलटों के स्वास्थ्य को लेकर चल रही बहस अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। देश के लगभग 5,000 पायलटों का प्रतिनिधित्व करने वाले शीर्ष संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (एफआईपी) ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू को पत्र लिखकर एयरलाइनों को दी गई सभी रियायतें तत्काल समाप्त करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पायलटों की ड्यूटी और आराम से जुड़े नियमों में किसी भी तरह की ढील सीधे तौर पर यात्री सुरक्षा के साथ समझौता है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मामले की जड़ नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियम हैं। इन नियमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया था, ताकि पायलटों की थकान को कम किया जा सके और उड़ान संचालन को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके। लेकिन डीजीसीए ने इंडिगो और एयर इंडिया जैसी प्रमुख घरेलू एयरलाइनों को इन नियमों में विशेष छूट दे दी। इन छूटों के तहत दो-पायलट वाले बोइंग 787 ड्रीमलाइनर जैसे विमानों के संचालन में नाइट लैंडिंग की संख्या और ड्यूटी समय बढ़ाने की अनुमति दी गई है।
एफआईपी ने आरोप लगाया है कि ये छूट सुरक्षा नहीं, बल्कि एयरलाइनों के व्यावसायिक हितों को ध्यान में रखकर दी गई हैं। संगठन ने 19 दिसंबर को भेजे गए पत्र में साफ शब्दों में कहा है कि एयरलाइनों द्वारा पायलटों की कमी का तर्क पूरी तरह भ्रामक है। एफआईपी के अनुसार, देश की सभी घरेलू एयरलाइनों के पास अपने मौजूदा विमानों के संचालन के लिए पर्याप्त से अधिक पायलट उपलब्ध हैं। ऐसे में सुरक्षा नियमों में ढील देने का कोई औचित्य नहीं बनता।
संगठन ने केवल मौजूदा छूटों को वापस लेने की ही नहीं, बल्कि भविष्य में एयरलाइनों के विस्तार को लेकर भी सख्त रुख अपनाने की मांग की है। एफआईपी ने सुझाव दिया है कि किसी भी एयरलाइन को नए विमान शामिल करने या नई उड़ानों की समय-सारिणी को मंजूरी तभी दी जानी चाहिए, जब उसके पास पर्याप्त पायलट, केबिन क्रू, ग्राउंड स्टाफ, इंजीनियर और पार्किंग स्लॉट मौजूद हों। इन बुनियादी शर्तों के बिना किसी भी तरह के विस्तार को मंजूरी देना यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ होगा।
एफआईपी का यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है, जब भारतीय विमानन बाजार तेजी से विस्तार के दौर से गुजर रहा है और उड़ानों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पायलटों के इस कड़े रुख से सरकार और एयरलाइनों पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या मुनाफे की दौड़ से ऊपर रखकर सुरक्षा और मानवीय सीमाओं को प्राथमिकता दी जाती है या






