आगरा| हमीरपुर के शैलेंद्र देवपाल, चंदौसी के पंकज कुमार, इटावा के सलीम खान, बांदा के देवराज सहित 14 लोगों की दुखद मौत ने पूरे आगरा-मथुरा क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। ये सभी लोग जिनकी जिंदगी के सफर में मौत ने अचानक हस्तक्षेप किया, उनकी पहचान तक करना मुश्किल हो रहा है। हादसे में जले हुए वाहनों से 14 नरमुंड और कई हड्डियां बरामद की गई हैं। मृतकों के परिजन अंतिम संस्कार के लिए उनके अवशेष चाहते हैं, लेकिन गंभीर स्थिति के कारण उन्हें पुलिस और विज्ञान प्रयोगशाला के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
अगरा की विधि विज्ञान प्रयोगशाला में मृतकों की हड्डियां और नरमुंड भेजे गए हैं, जहां डीएनए जांच के लिए वैज्ञानिक जुटे हैं। डिप्टी डायरेक्टर अशोक कुमार ने बताया कि हड्डियों से बोन मैरो और दांतों के पल्प से डीएनए लिया जा सकता है। लेकिन हादसे की आग इतनी भीषण थी कि हड्डियां हाथ में लेते ही चूर हो रही हैं और दांत भी टूटने लगे हैं, जिससे डीएनए निकालना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
इस संवेदनशील मामले की जांच के लिए पहले से आगरा में चार वैज्ञानिकों की टीम कार्यरत थी। इनमें वैज्ञानिक अधिकारी शशि शेखर पांडेय, डिप्टी डायरेक्टर पवन कुमार, तथा वैज्ञानिक राकेश, बाबू और शुभम गाना शामिल हैं। अब लखनऊ और गाजियाबाद से भी विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है। लखनऊ से वैज्ञानिक अधिकारी प्रगति सिंह और गाजियाबाद से डिप्टी डायरेक्टर अनीता पुंडीर इस जांच में जुटी हैं। दोनों ही विशेषज्ञ पहले कई बड़े मामलों में डीएनए जांच कर चुके हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस ने मृतकों के परिवारों से 20 सैंपल लिए हैं, जिनका डीएनए जांच के बाद मिलान किया जाएगा। अधिकारी दिन-रात जुटकर काम कर रहे हैं ताकि जल्द से जल्द मृतकों की पहचान हो सके और परिजन अपने अपनों को अंतिम विदाई दे सकें।
हादसे में हुई भीषण आग और जले हुए वाहनों की स्थिति ने जांचकर्ताओं के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। परिजनों में बढ़ती बेचैनी और डीएनए जांच की प्रक्रिया की धीमी गति ने हादसे की संवेदनशीलता और गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

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