आगरा। जिले के हाईवे और एक्सप्रेस वे पर सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जनवरी से नवंबर 2025 तक जिले में कुल 1360 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 694 लोगों की मौत हो चुकी है और 1188 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसका मतलब है कि हर दिन लगभग दो लोगों की जान सड़क हादसों में जा रही है।

पुलिस के अनुसार, हादसों के मुख्य कारणों में तेज रफ्तार, नींद या झपकी, सड़क पर आवारा पशु और सड़क में गड्ढे शामिल हैं। हादसों के बाद केवल तात्कालिक सुधार किए जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की श्रृंखला लगातार जारी रहती है।

डीसीपी ट्रैफिक सोनम कुमार ने बताया कि सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के सर्वे में आगरा उन 20 उत्तर प्रदेश के जिलों में शामिल है, जहां सबसे अधिक दुर्घटनाएं होती हैं। जिले में कुल 208 क्रिटिकल क्रैश लोकेशन हैं, जिन पर दो या अधिक बार हादसे हो चुके हैं। सुधार के लिए 14 क्रिटिकल कॉरिडोर टीम बनाई गई है।

इस बीच, राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने कोहरे के दौरान एक्सप्रेस-वे पर यातायात पूरी तरह रोकने की मांग की है। सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि कोहरे में शून्य दृश्यता के कारण एक्सप्रेस-वे पर कई गंभीर हादसे होते हैं, जिससे कई परिवार पूरी तरह उजड़ जाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि कोहरे में 5 से 7 घंटे तक एक्सप्रेस-वे पर यातायात बंद रखा जाना चाहिए।

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कोहरे या खराब मौसम में स्पीड आधी कर दें और आगे वाली गाड़ी से दूरी दोगुनी रखें। लो‑बीम और फॉग लैंप का इस्तेमाल करें, इंडिकेटर और हाजार्ड लाइट से पीछे वालों को चेतावनी दें, और अगर गाड़ी रोकनी पड़े तो धीरे‑धीरे बाईं तरफ ले जाएं।

इस प्रकार आगरा में सड़क सुरक्षा की स्थिति गंभीर बनी हुई है, और तुरंत ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि हर दिन जानें जाने वाली अनगिनत परेशानियों को रोका जा सके।

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