ग्राम सभा के क्षेत्रफल से कई गुना जमीन का कराया गया बीमा
लखनऊ| बुंदेलखंड क्षेत्र में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन में हर स्तर पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। गांव-गांव की पड़ताल में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिनसे साफ होता है कि कहीं ग्राम सभा के कुल रकबे से तीन से चार गुना अधिक जमीन का बीमा करा लिया गया, तो कहीं औद्योगिक क्षेत्र की जमीन पर भी किसानों के नाम पर बीमा क्लेम ले लिया गया। किसानों का आरोप है कि यह खेल बीते कई वर्षों से चल रहा है और बीमा प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी भी इसमें बराबर के भागीदार हैं।
महोबा जिले की लुहारी ग्राम सभा का मामला इस गड़बड़ी की बानगी के तौर पर सामने आया है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार लुहारी ग्राम सभा का कुल क्षेत्रफल 747.364 हेक्टेयर है, लेकिन खरीफ 2024 में यहां 396 किसानों ने 1138 हेक्टेयर जमीन का फसल बीमा करा लिया। इस दौरान व्यक्तिगत दावों के जरिए करीब 1.35 करोड़ रुपये और फसल कटाई प्रयोग के आधार पर लगभग 47 लाख रुपये का बीमा क्लेम लिया गया। हैरानी की बात यह है कि यह बीमित क्षेत्र ग्राम सभा के कुल रकबे से कहीं अधिक था, इसके बावजूद उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
किसानों का आरोप है कि जब खरीफ 2024 में दोगुने क्षेत्रफल पर बीमा और क्लेम होने के बावजूद कोई सवाल नहीं उठा, तो खरीफ 2025 में गड़बड़ी और बढ़ा दी गई। खरीफ 2025 में लुहारी ग्राम सभा में 686 किसानों के नाम पर करीब 2880.06 हेक्टेयर जमीन का बीमा करा दिया गया, जो ग्राम सभा के कुल क्षेत्रफल से लगभग चार गुना है। हालांकि इस बार मामला सामने आने के बाद बीमा क्लेम को फिलहाल रोक दिया गया है।
ग्रामीणों से जब गांव के वास्तविक रकबे को लेकर सवाल किए गए तो किसान खतौनी और सरकारी दस्तावेज दिखाने लगे। लुहारी के किसान राम सामुझ ने आरटीआई के माध्यम से ग्राम सभा का पूरा विवरण निकलवाया है। दस्तावेज दिखाते हुए वह सवाल उठाते हैं कि जब ग्राम सभा का कुल क्षेत्रफल तय है, तो उससे चार गुना अधिक जमीन का बीमा और क्लेम आखिर कैसे कर दिया गया। उनका कहना है कि यह सब बिना अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं है।
झांसी जिले के किसान अजित का कहना है कि जिले में बने इंडस्ट्रियल एरिया की जमीन पर खेती होना संभव ही नहीं है, इसके बावजूद वहां की जमीन पर भी किसी न किसी के नाम से फसल बीमा क्लेम ले लिया गया। उनके अनुसार यह सिर्फ एक गांव या एक जिले की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे बुंदेलखंड में यह खेल लंबे समय से चल रहा है।
किसान मदन मोहन राजपूत और उनके साथ मौजूद अन्य किसानों का दावा है कि बीमा योजना का उद्देश्य किसानों को आपदा से राहत देना था, लेकिन इसे अवैध कमाई का जरिया बना लिया गया है। उनका आरोप है कि लेखपाल से लेकर कृषि विभाग और बीमा कंपनियों तक, हर स्तर पर जिम्मेदार लोग इस मनमानी में शामिल हैं। किसानों ने मांग की है कि पूरे बुंदेलखंड में फसल बीमा योजना की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि योजना का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंच सके।






