बहराइचl उत्तर प्रदेश के नेपाल बॉर्डर से सटे बहराइच जिले में आदमखोर भेड़िये गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि भेड़ियों को जिंदा पकड़ना कठिन जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। पिछले साल बहराइच में वनकर्मियों ने तीन आदमखोर भेड़ियों को जीवित पकड़कर यह साबित भी किया था, हालांकि बीते दो वर्षों में छह भेड़ियों को मारना पड़ा।

भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार पूरे देश में भेड़ियों की संख्या लगभग 2800 है, जबकि उत्तर प्रदेश में इनकी संख्या 100 से 200 के बीच मानी जाती है। हालांकि, भेड़ियों की कभी आधिकारिक गणना नहीं हुई है। यूपी वन एवं वन्यजीव विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि राज्य में भेड़ियों की संख्या डब्ल्यूआईआई के अनुमान से कहीं अधिक, करीब दो हजार तक हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार भेड़िये आमतौर पर हिरन, बकरी, खरगोश और भेड़ों का शिकार करते हैं तथा नदियों के कछार में मांद बनाकर रहते हैं। जब इनके शिकार की उपलब्धता कम हो जाती है या प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचता है, तब ये आदमखोर बन जाते हैं। नदियों के कछार में हो रहे खनन से भेड़ियों की मांदें नष्ट हो रही हैं, जिससे उनका व्यवहार और अधिक हिंसक हो रहा है।

डब्ल्यूआईआई द्वारा भेड़ियों को विलुप्त प्रजाति में शामिल कराने के प्रयास किए गए थे, लेकिन आवश्यक आंकड़ों के अभाव में यह संभव नहीं हो सका। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कन्जर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) के मानकों के अनुसार पिछले 30 वर्षों की संख्या में गिरावट का डेटा उपलब्ध न होने के कारण भेड़ियों को विलुप्त नहीं, बल्कि ‘वल्नरेबल’ यानी खतरे में प्रजाति की श्रेणी में रखा गया है।

डब्ल्यूआईआई के विशेषज्ञ डॉ. शहीर खान का कहना है कि भेड़ियों को पकड़ना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि वे लगातार तेज गति से दौड़ते रहते हैं और उन्हें ट्रैंक्युलाइज करना आसान नहीं है। इसके बावजूद, इंसानों खासकर बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जहां तक संभव हो, भेड़ियों को मारने के बजाय जीवित पकड़ने का प्रयास किया जाना चाहिए, जैसा कि पहले सफलतापूर्वक किया जा चुका है।

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