लखनऊ| यूपी की राजधानी लखनऊ में साइबर ठगों का नेटवर्क लगातार सक्रिय होता जा रहा है। विकासनगर इलाके में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के अफसरों और पुलिस की सतर्कता से पीडब्ल्यूडी के पूर्व अफसर की पत्नी ऊषा शुक्ला एक बड़े डिजिटल अरेस्ट ठगी गिरोह का शिकार होने से बच गईं। जालसाजों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और जेल भेजने की धमकी दी थी।
डरी-सहमी ऊषा शुक्ला ठगों के दबाव में अपनी 10 एफडी, जिनकी कुल राशि करीब डेढ़ करोड़ रुपये थी, तुड़वाने पीएनबी की शाखा पहुंच गईं। इतनी बड़ी रकम एक साथ निकालने की कोशिश पर बैंक की डिप्टी मैनेजर इंद्राणी को शक हुआ। उन्होंने ऊषा से सवाल किए, लेकिन वह कुछ भी बताने को तैयार नहीं थीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी मैनेजर ने तत्काल उच्चाधिकारियों और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही एसीपी गाजीपुर अनिद्य विक्रम सिंह ने थाना प्रभारी विकासनगर आलोक कुमार सिंह को जांच के निर्देश दिए। पुलिस बल मौके पर पहुंचा और ऊषा शुक्ला को बैंक मैनेजर स्वर्ण राठौर के केबिन में बुलाकर पूछताछ शुरू की गई।
पुलिस और बैंक अफसरों ने काउंसिलिंग कर ऊषा शुक्ला के मन से डर निकालने की कोशिश की। काफी समझाने के बाद उन्होंने बताया कि कुछ अज्ञात लोगों ने फोन कर खुद को अधिकारी बताते हुए उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में डिजिटल अरेस्ट करने की धमकी दी थी। पुलिस ने तुरंत मोबाइल नंबर के आधार पर जांच शुरू कर दी।
ऊषा शुक्ला ने बताया कि उनके पति पीडब्ल्यूडी में अफसर थे और उनका निधन हो चुका है, जबकि बेटा शहर से बाहर नौकरी करता है। एसीपी ने बताया कि पीड़िता के बयान और तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। डिजिटल अरेस्ट ठगी गिरोह तक पहुंचने के लिए मोबाइल नंबरों और कॉल डिटेल्स की गहन जांच की जा रही है।





