नाम और NOTA न होने पर आपत्ति, केंद्र व यूपी सरकार से जवाब तलब
लखनऊ। पंचायत चुनावों में इस्तेमाल होने वाले बैलेट पेपर को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने बैलेट पेपर पर केवल चुनाव चिह्न होने और प्रत्याशियों के नाम न छपने पर गंभीर आपत्ति जताई है।
याचिका में दलील दी गई कि बैलेट पेपर पर प्रत्याशियों के नाम न होने से ग्रामीण और अशिक्षित मतदाताओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे वे सही उम्मीदवार को वोट देने से वंचित रह सकते हैं। इसे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांत के खिलाफ बताया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि पंचायत चुनावों में NOTA (None of the Above) का विकल्प न दिया जाना मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। मतदाता को यह अधिकार होना चाहिए कि वह सभी प्रत्याशियों को अस्वीकार कर सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार,उत्तर प्रदेश सरकार,और राज्य निर्वाचन आयोग
से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा है और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद निर्धारित की है। तब तक सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना होगा।
इस याचिका के फैसले का असर पंचायत चुनावों की पूरी प्रक्रिया पर पड़ सकता है। यदि कोर्ट याचिका को स्वीकार करता है, तो भविष्य में बैलेट पेपर के स्वरूप में बड़ा बदलाव संभव माना जा रहा है।





