नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी (Congress party) के भीतर अंदरूनी समीकरण एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की अध्यक्षता में शुक्रवार को कांग्रेस सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, लेकिन इस बैठक में शशि थरूर (Shashi Tharoor) शामिल नहीं हुए। यह पहला या दूसरा नहीं, बल्कि लगातार तीसरा मौका है जब वे ऐसी रणनीतिक बैठकों से गैरहाज़िर रहे हैं।
बैठक में संसद की कार्यवाही, विपक्ष की रणनीति और आगामी सत्रों में सरकार को घेरने की योजनाओं पर चर्चा हुई। लगभग सभी कांग्रेस सांसद मौजूद रहे, लेकिन थरूर की खाली कुर्सी एक बार फिर नेताओं के बीच चर्चा का कारण बनी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि लगातार अनुपस्थिति “संदेश” देती है और संगठन में समन्वय की कमी को उजागर करती है।
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रहा है। हालाँकि, अब तक पार्टी की ओर से थरूर की अनुपस्थिति पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। थरूर की ओर से भी इस बारे में कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
थरूर पहले भी पार्टी की नीतियों व संगठनात्मक फैसलों पर कई बार खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं। केरल में भी उनके कुछ बयान संगठन की मुख्य लाइन से अलग देखे गए थे। लगातार तीसरी अनुपस्थिति को कई नेता “नाराज़गी या दूरी का संकेत” मान रहे हैं। ऐसे समय में जब कांग्रेस को संसद और जमीन दोनों पर एकजुटता दिखानी है, थरूर का गैरहाज़िर रहना पार्टी के लिए चुनौती बनता दिख रहा है।


