साइबर अपराध के गढ़ पर तड़के सबसे बड़ी कार्रवाई, 42 संदिग्ध हिरासत में, खुलेंगे कई राज

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चार एसपी, चार सीओ, 26 इंस्पेक्टर और 300 जवान,साइबर ठगों को पकड़ने के लिए पुलिस का सबसे बड़ा ऑपरेशन

मथुरा। साइबर अपराध के लिए ‘मिनी जामताड़ा’ बन चुके देवसेरस और आसपास के गांवों में गुरुवार तड़के पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। तड़के करीब चार बजे शुरू हुए इस ऑपरेशन क्रेक डाउन ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। चार एसपी, चार सीओ, 26 इंस्पेक्टर और 300 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की टीम ने देवसेरस, दौलतपुर, मुड़सेरस और नगला अकातिया गांवों को चारों ओर से घेरकर सघन तलाशी अभियान चलाया। भारी पुलिस बल को देखकर संदिग्धों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के चलते किसी को भी भागने का मौका नहीं मिला।

पुलिस ने कुल 42 संदिग्धों को हिरासत में लिया, जिनमें आठ ऐसे लोग शामिल हैं जिनका पहले भी आपराधिक गतिविधियों से संबंध रहा है। कई संदिग्धों के पास से बड़ी संख्या में सिम कार्ड, मोबाइल फोन, आधार कार्ड और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए। साइबर सेल और स्थानीय पुलिस टीमें इन सभी से गहन पूछताछ कर रही हैं ताकि साइबर नेटवर्क, उसके सरगनाओं और उनके काम करने के तरीकों का खुलासा किया जा सके।

देवसेरस लंबे समय से साइबर ठगी का केंद्र बना हुआ है और यहां से कॉल सेंटर फ्रॉड, KYC अपडेट ठगी, बैंक वॉइस कॉल स्कैम सहित ऑनलाइन धोखाधड़ी के कई मामलों में इनपुट मिलते रहे हैं। लगातार बढ़ती शिकायतों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने इस संयुक्त अभियान की योजना तैयार की थी।

इस बीच चर्चा यह भी है कि साइबर ठगों ने हाल ही में सत्ता पक्ष के एक वीआईपी के साथ 25 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है। इसे लेकर पुलिस की बड़ी और गोपनीय कार्रवाई के सियासी संकेत भी चर्चा में हैं। हालांकि पुलिस ने इस संबंध में आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है, लेकिन 42 लोगों की सामूहिक हिरासत और कार्रवाई को गोपनीय रखने से सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं।

एसपी ग्रामीण मथुरा सुरेशचंद्र रावत ने बताया कि कई आपत्तिजनक सामग्री, आधार कार्ड, संदिग्ध मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं। 42 लोगों से विभिन्न टीमें अलग-अलग पूछताछ कर रही हैं। कुछ नाबालिगों को भी संरक्षण में लेकर पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि आज शुक्रवार तक स्थिति और अधिक स्पष्ट हो जाएगी तथा कई बड़े खुलासे संभव हैं।

साइबर अपराध पर नकेल कसने के लिए पुलिस ने इस बड़े अभियान को अल्फा और बीटा ग्रुपों में बांटकर संचालन किया। चार वरिष्ठ अधिकारियों की कमान में टीमें अपने-अपने लक्ष्यों के साथ गांवों में उतरीं। खास बात यह रही कि थाना गोवर्धन पुलिस को इस अभियान से अलग रखा गया।

मथुरा में साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस का यह अब तक का सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन माना जा रहा है, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में खौफ और सतर्कता का माहौल है। पुलिस का कहना है कि ठगी के बड़े नेटवर्क की कड़ियां जल्द उजागर होने की संभावना है और शुक्रवार को कई बड़ी जानकारियां सामने आ सकती हैं।

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