भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ तेज: नामांकन से पहले ही केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को मिलने लगी बधाइयाँ, 400 सदस्य करेंगे नया अध्यक्ष तय

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यूथ इंडिया (शरद कटियार)
लखनऊ। उत्तर प्रदेश भाजपा में नए प्रदेश अध्यक्ष की ताजपोशी को लेकर महीनों से चल रही चर्चाएं अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई हैं। प्रांतीय परिषद के करीब 400 सदस्यों की सूची जारी होने के बाद संगठनात्मक गतिविधियां तेज हो गई हैं और माना जा रहा है कि पार्टी 16 दिसंबर, खरमास शुरू होने से पहले नया प्रदेश अध्यक्ष घोषित कर देगी। इस बीच सोशल मीडिया पर बधाइयों की बाढ़ ने साफ संकेत दे दिया है कि केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और महाराजगंज से सात बार के सांसद पंकज चौधरी सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभर आए हैं। फेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुपों में लोग एक-दूसरे को अग्रिम बधाइयां दे रहे हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। बावजूद इसके, भाजपा के भीतर इस संभावना से कोई इनकार भी नहीं कर रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष को लेकर सरगर्मी तेज, संगठनात्मक गतिविधियां चरम पर
प्रांतीय परिषद के सदस्यों की सूची जारी होते ही प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। यह वही परिषद है जिसके लगभग 400 सदस्य भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष चुनेंगे।पार्टी सूत्रों के अनुसार, नाम लगभग तय माना जा रहा है और दिल्ली-लखनऊ के बीच बैठकों का दौर पूरा हो चुका है। भाजपा नेतृत्व प्रदेश में एक ऐसे चेहरे को सामने लाना चाहता है जो शांत, अनुभवी, संगठननिष्ठ और जातीय समीकरणों में संतुलन स्थापित करने में सक्षम हो।
सोशल मीडिया पर बधाइयों का दौर, पंकज चौधरी की दावेदारी और मजबूत
भाजपा की ओर से आधिकारिक बयान अभी तक नहीं आया, लेकिन उत्तर प्रदेश के कई जिलों में समर्थक फेसबुक, इंस्टाग्राम और वाट्सऐप ग्रुपों पर बधाइयों के पोस्ट साझा कर रहे हैं।पार्टी के भीतर भी कार्यकर्ताओं में उत्सुकता बढ़ गई है और अधिकांश का मानना है कि भाजपा इस बार किसी जमीन से जुड़े मजबूत ओबीसी नेता को प्रदेश कमान सौंपकर 2027 की तैयारियों को धार देना चाहती है।
पंकज चौधरी स्थानीय पार्षद से लेकर 7 बार के सांसद तक का लंबा राजनीतिक सफर
पंकज चौधरी का राजनीतिक जीवन बेहद साधारण पायदान से शुरू हुआ। 1989 में गोरखपुर नगर निगम के पार्षद बने।उसी वर्ष गोरखपुर से अलग हुआ महाराजगंज जिलयहीं बनाई राजनीतिक जमीन।1991 में उन्होंने पहली बार महाराजगंज से लोकसभा चुनाव जीता। इसके बाद वे सात बार सांसद चुने गए एक ऐसा आंकड़ा जो उन्हें पूर्वांचल की राजनीति में सबसे स्थायी चेहरों में शामिल करता है।
वर्तमान में वह केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री हैं और संगठन के भीतर उनकी छवि एक बेहद शांत, विनम्र और सुलझे हुए नेता की है।
पंकज चौधरी का पारिवारिक आधार, स्थानीय राजनीति में मजबूत पकड़
पंकज चौधरी का परिवार भी स्थानीय स्तर पर सक्रिय और प्रभावशाली रहा है।पिता स्व. भगवती प्रसाद चौधरी जमींदार परिवार से थे।माता उज्ज्वल चौधरी महाराजगंज जिला पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी हैं।पत्नी भाग्यश्री चौधरी सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं।एक पुत्र और एक पुत्री उनके परिवार में हैं।पारिवारिक प्रभाव के साथ उनका स्थानीय विकास कार्यों में सक्रिय योगदान क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता का आधार रहा है।
कुर्मी समुदाय का बड़ा चेहरा, ओबीसी समीकरण में भाजपा का भरोसेमंद नाम
उत्तर प्रदेश में कुर्मी आबादी लगभग 9 से 10 प्रतिशत मानी जाती है और पूर्वांचल के 50 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाती है।
पंकज चौधरी कुर्मी समाज के सबसे बड़े नेताओं में गिने जाते हैं भाजपा की गैर-यादव ओबीसी राजनीति में उनका स्थान बेहद अहम रहा है।
स्वतंत्र देव सिंह के बाद कुर्मी समाज को फिर से एक बड़े चेहरे की जरूरत थी, जिसे चौधरी पूरा करते हैं।2024 में कई कुर्मी वोट स्क्क की ओर शिफ्ट हुए थे, ऐसे में भाजपा एक बार फिर इस समुदाय को जोडऩे की रणनीति पर काम कर रही है। संगठन मानता है कि पंकज चौधरी की ताजपोशी ओबीसी समीकरण को मजबूत करेगी और 2027 की विधानसभा रणनीति को गति देगी।
भाजपा की दीर्घकालीन रणनीति के अनुकूल चेहरा
भाजपा नेतृत्व प्रदेश इकाई में एक ऐसा प्रबंधक चाहती है जो 2027 के लिए जमीनी स्तर पर संगठन को फिर से सशक्त कर सके। चौधरी का अनुभव और व्यापक स्वीकृति उन्हें अन्य दावेदारों से आगे खड़ा करती है।
भाजपा खेमे में बढ़ती बेसब्री
भाजपा प्रदेश कार्यालय में तैयारियां पूरी बताई जा रही हैं। सूत्रों का दावा है कि अगले 48 घंटे में घोषणा हो सकती है। 16 दिसंबर से खरमास शुरू होने से पहले भाजपा नए अध्यक्ष की ताजपोशी करने के मूड में है। कार्यकर्ताओं के बीच भी इस संभावना को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है कि यूपी में अब एक अनुभवी और जमीन से जुड़े नेता को कमान मिल सकती है।

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