मनोज गंगवार
एक पल को ठहरकर सोचिए—जीवन ने आपको कितना कुछ दिया है। अक्सर हम अपनी इच्छाओं, लक्ष्यों और अधूरी ख्वाहिशों के पीछे इतनी तेजी से दौड़ते हैं कि उन चीज़ों को देख ही नहीं पाते जो कभी हमारे सपनों की सूची में सबसे ऊपर हुआ करती थीं।
वह घर, जिसकी कभी आपने कल्पना की थी… वे रिश्ते, जिनके लिए आपने ईश्वर से प्रार्थना की थी… वह मन की शांति, जिसकी तलाश में आप वर्षों भटकते रहे… क्या ये सब कभी आपकी ‘अधूरी चाहतों’ का हिस्सा नहीं थे? क्या आज ये चीज़ें आपकी ज़िंदगी का हिस्सा नहीं बन चुकी हैं?
फिर भी हम रोज़ एक नई इच्छा, नई चाह, नए लक्ष्य के पीछे भागने लगते हैं—जैसे जीवन हमें लगातार किसी न किसी प्रतियोगिता में धकेल रहा हो। लेकिन सच तो यह है कि प्रतियोगिता जीवन की नहीं, हमारी अपनी अपेक्षाओं की होती है। मन जितना पाता है, उतनी ही तेज़ी से और पाने के लिए लालायित हो जाता है।
मनुष्य का स्वभाव ऐसा है कि वह उपलब्धियों को जीते-जीते सामान्य मान लेता है। जिस घर को बनाने का सपना देखकर हम रातों की नींद खो देते थे, वह घर बनने के बाद कुछ ही समय में ‘सामान्य’ लगने लगता है। जिस रिश्ते के लिए हम बेचैन रहते थे, वही रिश्ता दिनचर्या में शामिल होकर अपनी चमक खो देता है। जिस शांति की तलाश में हम दूर-दूर भटके, वही शांति जब मिल जाती है, तो हम उसे महसूस करने का समय ही नहीं निकालते।
जीवन में आगे बढ़ना गलत नहीं है, लेकिन जो हमारे पास है, उसे महसूस न कर पाना—यह एक बड़ी कमी है। कभी-कभी जीवन की यात्रा में रुकना भी एक उपलब्धि होती है। रुकना मतलब पीछे हटना नहीं—बल्कि अपनी प्राप्तियों को पहचानना, उन्हें जीना और उनका सम्मान करना।
ठहरना हमें तीन बातें सिखाता है जो हमारे पास है, वह किसी चमत्कार से कम नहीं। लगातार भागते रहने से मन थक जाता है, ठहराव उसे नई ऊर्जा देता है। भविष्य की चिंता में वर्तमान खो देना बुद्धिमानी नहीं।
हम यह मानने लगते हैं कि अगली उपलब्धि हमें खुश करेगी।अगली नौकरी…अगली कार…अगली कमाई…अगला लक्ष्य… लेकिन जैसे ही वह मिल जाता है, मन फिर आगे भागने लगता है। इसलिए खुशी का ठिकाना न अतीत है, न भविष्य। खुशी वहीं है जहाँ आप हैं—बस उसे देखने की कला चाहिए।
क्या करें? दिन में कुछ पल रुककर अपनी प्राप्तियों के बारे में सोचें। उस घर को देखें, जो कभी सपना था। उस परिवार को महसूस करें, जो आपके लिए दुनिया है। उस शांति को पहचानें, जो आपके भीतर है।और खुद को धन्यवाद दें—क्योंकि आपने ही यह सब हासिल किया है। जीवन सिर्फ आगे बढ़ने का नाम नहीं है, जीवन महसूस करने का नाम है।
और कभी-कभी, ठहरना भी एक उपलब्धि होती है। शायद अब समय है कि आप थोड़ी देर रुककर अपने जीवन की रोशनी को पहचानें—क्योंकि जो आपके पास है, वह कभी आपकी सबसे बड़ी इच्छा हुआ करता था।


