किसान–आढ़तियों की मूलभूत सुविधाओं की मांग पर ध्यान नहीं

फर्रुखाबाद। नवीन मंडी स्थल सातनपुर में किसानों और आढ़तियों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। लंबे समय से मंडी प्रशासन से बार-बार की जा रही शिकायतों और मांगों के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। मंडी में उपलब्ध संसाधनों की कमी और अव्यवस्थाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है, जिससे व्यापारियों, किसानों और खरीदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

मंडी में खराब लाइटों के कारण शाम होते ही चारों ओर अंधेरा छा जाता है। इससे न केवल खरीद-फरोख्त प्रभावित होती है, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी यह गंभीर समस्या बन गई है। मंडी परिसर में पीने के पानी की उचित व्यवस्था न होने से किसान और मजदूर दूर-दूर तक पानी तलाशने को मजबूर रहते हैं।

गंदगी का अंबार और जगह-जगह जमा कचरे ने सफाई व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। नालियों की नियमित सफाई न होने से बदबू फैलती रहती है और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। व्यापारी बताते हैं कि कई बार शिकायत करने के बावजूद सफाई कर्मियों की तैनाती और निगरानी में सुधार नहीं किया गया।

सबसे चिंताजनक समस्या आवारा पशुओं की है। छुट्टा जानवर मंडी परिसर में घूमते रहते हैं और किसानों की फसल—खासकर आलू, अनाज और सब्जियों—को खाकर भारी नुकसान पहुंचाते हैं। प्रशासन की ओर से सुरक्षा गार्ड तैनात होने के बावजूद उन पर नियंत्रण नहीं हो पाता। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन गार्डों की मिलीभगत से ही यह स्थिति बनाई रखी जाती है और पशुओं को मंडी में प्रवेश करने से नहीं रोका जाता।

किसान और आढ़ती मांग कर रहे हैं कि मंडी प्रशासन तत्काल प्रभाव से प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, सफाई, सुरक्षा और आवारा पशुओं के नियंत्रण को प्राथमिकता दे। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो मंडी की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है, जिसका सीधा प्रभाव व्यापार और किसानों की आय पर पड़ेगा।

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