हनुमानगढ़/ जयपुरl गुरुवार का दिन भी तनावपूर्ण बना रहा, क्योंकि किसान और विपक्षी राजनीतिक दलों के नेता निर्माणाधीन एथेनॉल फैक्टरी के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। किसानों का कहना है कि उनका आंदोलन तब तक चलेगा जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं।

सुबह से ही किसान तिब्बी के पास स्थित गुरुद्वारे में एकत्र होने लगे, वहीं इलाके में इंटरनेट सेवाएं लगातार दूसरे दिन बंद रहीं। फैक्टरी के आसपास रहने वाले लगभग 30 परिवार डर की वजह से अपने घर छोड़कर चले गए।

यह विरोध बुधवार को तब हिंसक रूप ले गया, जब सैकड़ों किसानों ने राठीखेड़ा गांव में स्थित ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड के निर्माण स्थल पर धावा बोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने फैक्टरी की दीवार तोड़ दी, दफ्तर और कई वाहनों में आग लगा दी। जब पुलिस ने प्रदर्शन को रोकने की कोशिश की, तो दोनों पक्षों के बीच जमकर भिड़ंत हुई। पुलिस ने लाठीचार्ज और आँसू गैस का इस्तेमाल किया, जिससे किसानों का गुस्सा और भड़क गया। हिंसा के दौरान किसानों ने एक पुलिस जीप और दर्जनभर से अधिक वाहन जला दिए।

इस झड़प में 50 से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं। कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया को सिर में चोट आई और उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया। बुधवार को स्थिति को देखते हुए स्कूल, कॉलेज और बाजार बंद रहे।

हनुमानगढ़ कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव ने बताया कि एथेनॉल फैक्टरी को सभी जरूरी स्वीकृतियां मिल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना 2022 में राइजिंग राजस्थान समिट के दौरान स्वीकृत हुई थी और भूमि रूपांतरण से लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमतियां भी प्राप्त हैं। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण महापंचायत की अनुमति दी गई थी, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर फैक्टरी की ओर बढ़कर कानून हाथ में ले लिया।

गुरुवार को हालात सामान्य दिखे और दुकानें खुल गईं, लेकिन किसान गुरुद्वारे में जुटते रहे। दोपहर में आगे की रणनीति तय करने के लिए किसानों की बैठक आयोजित होने वाली है। कई घायल महिलाएं भी गुरुद्वारा सिंह सभा में रातभर रुकी रहीं।

कांग्रेस, सीपीआई(एम) और हरियाणा-पंजाब के किसान संगठनों के नेता आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। फैक्टरी हटाओ संघर्ष समिति के नेता रवजोत सिंह ने कहा कि झड़प में 70 से अधिक लोग घायल हुए और 100 से ज्यादा किसान रातभर गुरुद्वारे में रुके। कांग्रेस नेता शबनम गोडारा ने आरोप लगाया कि हिंसा के लिए प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार है। उनका कहना है कि किसानों ने सिर्फ लिखित आश्वासन मांगा था कि निर्माण रोका जाएगा, लेकिन प्रशासन ने उनकी मांगों की अनदेखी कर हालात बिगाड़े।

किसान संगठनों का कहना है कि जब तक पर्यावरण मंजूरी और स्थानीय निवासियों की सहमति नहीं मिलती, फैक्टरी नहीं चलने दी जाएगी। वहीं, चंडीगढ़ स्थित ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड का कहना है कि यह परियोजना केंद्र के एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को बढ़ावा देगी।

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