वाराणसी में कोडीन कफ़ सिरप तस्करी के खुलासे मे कार्यवाही ढीली

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दो आरोपी गिरफ्तार, लेकिन सिंडिकेट का मुख्य किंगपिन अब भी फरार, एफएसडीए अधिकारियों पर उठ रहे सवाल

वाराणसी। जिले में कोडीन कफ़ सिरप की करोड़ों रुपये की अवैध तस्करी का बड़ा मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। पुलिस ने तस्करी रैकेट से जुड़े दो आरोपियों विशाल जायसवाल और बादल आर्या को गिरफ्तार किया है। दोनों ने फर्जी दस्तावेज़ों पर अपनी-अपनी फर्में रजिस्टर्ड करा रखी थीं, जिनका उपयोग तस्करों द्वारा नकली बिलिंग और फर्जी सप्लाई ऑर्डर तैयार करने में किया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार इन फर्मों का इस्तेमाल मुख्य सरगना शुभम जायसवाल के बेहद करीबी लोग करते थे। नकली बिलों के जरिए कोडीन कफ़ सिरप की सप्लाई को वैध दिखाया जाता था और प्रतिबंधित सिरप की बड़ी खेपें बाजार में उतारी जाती थीं।
मामले का सबसे बड़ा आरोपी और रैकेट का कथित किंगपिन शुभम जायसवाल अभी भी फरार है।
जांच एजेंसियों के पास उसके देश–विदेश तक फैले नेटवर्क की जानकारी होने के बावजूद अभी तक उसके ठिकाने की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है।
यह तथ्य जांच की गंभीरता पर और सवाल खड़े कर रहा है।
एफएसडीए अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर आरोप, फिर भी कार्रवाई शून्य है।
जांच में यह बात भी सामने आई है कि इस पूरे नेटवर्क के संचालन में FSDA (खाद्य एवं औषधि सुरक्षा विभाग) के कुछ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
कई बार शिकायतें मिलने के बाद भी किसी अधिकारी पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
बताया जाता है कि विभागीय ढिलाई ने रैकेट को वर्षों तक चलने का अवसर दिया।
छोटे आरोपियों पर कार्रवाई, बड़े खिलाड़ियों पर अभी भी सन्नाटा है।
विशाल और बादल की गिरफ्तारी के बाद भी नेटवर्क को संचालित करने वाले बड़े चेहरे आज़ाद घूम रहे हैं,
तस्करी की असली चेन का खुलासा अधूरा है,कोडीन की कुल खेप का ब्योरा स्पष्ट नहीं,रैकेट से जुड़े धन के लेन-देन की भी जांच धीमी है।
इससे स्पष्ट है कि नेटवर्क पर कार्रवाई आधी-अधूरी है, जबकि असली खतरा अभी भी बाहर है।
मुख्य आरोपी क्यों नहीं पकड़ा जा रहा?FSDA अधिकारी जांच से बाहर क्यों?रैकेट के आर्थिक स्रोत और अंतरराष्ट्रीय लिंक की जांच धीमी क्यों है?
क्या छोटे आरोपियों की गिरफ्तारी भर से मामला शांत करने की कोशिश हो रही है?
वाराणसी का यह कोडीन कफ़ सिरप घोटाला प्रदेश की औषधि निगरानी व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई दोनों पर बड़े सवाल खड़ा करता है।
दो गिरफ्तारियाँ महज शुरुआत हैं।
जब तक मुख्य किंगपिन और विभागीय लापरवाही के आरोपी दायरे में नहीं आते, तब तक यह कार्रवाई अधूरी ही मानी जाएगी।

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