नई दिल्ली| संसद के शीतकालीन सत्र में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ को लेकर बहस ने राजनीतिक गरमाहट पकड़ी। 7 नवंबर 2025 को इस गीत की 150वीं वर्षगांठ मनाई गई थी। संसद में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर 1937 में वंदे मातरम के कुछ अंश हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उस समय के फैजाबाद सेशन में राष्ट्रीय गीत से महत्वपूर्ण पैराग्राफ हटाए थे।
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए कहा, “प्रियंका गांधी का भाषण सुनो।” राहुल का यह कटाक्ष सीधे पीएम मोदी पर निशाना था और इसे विपक्ष के अंदर एक रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। राहुल गांधी के इस जवाब ने सदन में विपक्ष के नेताओं के बीच उत्साह पैदा किया और बहस का केंद्र बिंदु बन गया।
इस विवाद पर कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट किया कि 1937 में वंदे मातरम के कुछ अंश हटाने का निर्णय रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर लिया गया था और यह किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं किया गया। कांग्रेस ने पीएम मोदी से इस मामले में सार्वजनिक माफी की मांग की है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बहस न केवल इतिहास और राष्ट्रीय गीत से जुड़ा है, बल्कि आगामी चुनावों में राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी बन सकती है। इस बहस ने संसद के शीतकालीन सत्र में वंदे मातरम के महत्व और उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर नए सिरे से चर्चा को जन्म दिया है।
इस तरह, राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी के भाषण का हवाला देकर प्रधानमंत्री के आरोपों का सटीक और तेज़ी से जवाब दिया, जिससे विपक्ष में एक सामूहिक एकजुटता और संसद में बहस का नया मोड़ देखने को मिला।





