फर्रुखाबाद: गंगानगर में चल रहे बीसवें भागवत एवं मानस ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस मानस विद्वान डा.रामबाबू पाठक (Dr. Rambabu Pathak) ने अरण्य कांड की कथा सुनाई। वहीं भागवत (Bhagavad) कथा व्यास शिव शरण अग्निहोत्री ने राजा बलि और वामन भगवान की कथा श्रवण कराया। भागवत कथा व्यास आचार्य अग्निहोत्री ने कहा कि भक्त प्रहलाद कुल में जन्मे राजा बलि ने 100 यज्ञ करने का संकल्प लिया था जब 99 यज्ञ पूरे हो गए तो इंद्र का आसान डोल गया।
घबराकर इंद्र ,भगवान विष्णु के पास पहुंचे और कहा कि यदि सौवां यज्ञ पूरा हो गया तो उनका इंद्रासन छिन जाएगा। जिस पर भगवान विष्णु वामन भगवान का स्वरूप धारण करके राजा बलि के दरबार गये व राजा से याचना की और तीन डग जमीन मांग ली। राक्षसों के गुरु शुक्राचार्य ने कहा कि ये एक ही डग में सारा ब्रह्मांड नाप लेंगे लेकिन राजा बलि ने अपने वचन वापस नहीं लिए। वामन भगवान ने दो डगों में पृथ्वी और आकाश नाभिए तीसरे डग में राजा बलि का वक्ष नाप लिया। राजा बलि की दानशीलता देखकर प्रभु प्रसन्न हुए और सभी कुछ सभी कुछ उन्हें वापस दे दिया।
मानस की कथा व्यास को आगे डॉक्टर रामबाबू पाठक ने कहा वन में रावण ने भगवती सीता का हरण कर लिया उनको खोजते हुए भगवान राम व लक्ष्मण को घायल अवस्था में जटायु मिला उसने बताया कि रावण सीता का हरण करके रथ पर बैठ कर ले गया है ।उसने सीता को छुड़ाने का प्रयास किया तो रावण ने उसकी यह हालत कर दी है।
पक्षी ने भगवान राम के हाथों में ही अपने प्राण त्याग दिए तो भगवान ने उसका अंतिम संस्कार किया और उन्हें अपने पिता के मित्र होने के नाते पिता का ही दर्जा दिया। इस तरीके से भगवान के हाथों जटायु के कल्याण की कथा सुन कर कथा व्यास ने संदेश दिया कि प्रभु के लिए पूछनीच कुछ भी नहीं होता वे सभी को समान रूप से देखते हैं। उन्होंने कहा कि मानस समानता का ग्रंथ है जिसमें भगवान राम ने वैन में वनवासियों बंदर गीत सभी को गले लगाया यह ग्रंथ संदेश देता है कि सभी को गले लगाना चाहिए और किसी में भेदभाव नहीं करना चाहिए।
इस अवसर पर कथा का संचालन महेश पाल सिंह उपकारी ने किया। कार्यक्रम की व्यवस्था में विभोर सोमवंशी , अनमोल मिश्रा अवधेश पांडेय ,ऋषिपाल सिंह, अमित बाजपेई, बृज नारायण दुबे ,कुशल पाल सिंह ,निर्दोष शुक्ला, अरविंद चौहान , रामबाबू मिश्रा, नील कमल ने योगदान दिया।


