बागपत| नगर पालिका में आठ साल पुराना एक बड़ा घोटाला सामने आया है। वर्ष 2017 में तत्कालीन कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार द्वारा नगर पालिका के ठेकेदार पर 18.24 लाख रुपये की रिकवरी (आरसी) जारी कराई गई थी, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि एक लिपिक ने कमिश्नर से ऊपर होकर वह आरसी ही निरस्त कर दी। इतना ही नहीं, संबंधित फाइल को दबाकर मामला पूरी तरह छिपा दिया गया। अब चेयरमैन पद से राजुद्दीन को हटाए जाने के बाद फाइलों की दोबारा जांच में यह पूरा मामला सामने आया है।
जानकारी के अनुसार, यमुना पक्का घाट पर नाव संचालन का ठेका वर्ष 2011–14 तक इरशाद, निवासी केतीपुरा बागपत, को दिया गया था। ठेकेदार ने शुरुआत में 25 प्रतिशत राशि जमा की, लेकिन 18.24 लाख रुपये बाकी रहे, जो उसने जमा नहीं किए। ठेका समाप्त होने के बाद भुगतान न होने पर सितंबर 2017 में कमिश्नर ने आरसी जारी करने का आदेश दिया। आदेश के आधार पर तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ललित आर्य ने आरसी जारी भी कर दी।
मामले को जांच के दौरान जब फाइल निकाली गई, तो उसमें फरवरी 2018 का एक पत्र मिला, जो लिपिक महेश शर्मा के हस्ताक्षर से जारी हुआ था। इस पत्र में उसने चेयरमैन के कथित निर्देश पर आरसी निरस्त करने का पत्र तहसील में भेज दिया। इससे सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचा और ठेकेदार को सीधा लाभ मिला।
अधिशासी अधिकारी ललित आर्य ने कहा कि “मैंने आरसी निरस्त करने का कोई पत्र जारी नहीं किया है। पत्र लिपिक के हस्ताक्षर से जारी हुआ है। संभव है कि मेरे छुट्टी पर होने के दौरान लिपिक ने खुद निर्णय लिया हो।”
वर्तमान अधिशासी अधिकारी केके भड़ाना ने बताया कि नगर पालिका से जारी सभी आरसी का ब्योरा खंगाला जा रहा है। यह देखा जाएगा कि कितनी आरसी बिना अनुमति निरस्त की गईं और किन मामलों में राशि कम की गई। उन्होंने कहा कि मामले की पूरी जांच करके जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
इस खुलासे के बाद नगर पालिका की अन्य संदिग्ध फाइलों की भी जांच शुरू कर दी गई है, जिससे और घोटाले सामने आने की आशंका जताई जा रही है।




