हाईकोर्ट ने राहुल गांधी पर चुनावी रोक की मांग को किया खारिज

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दोषसिद्धि पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, इसलिए जन प्रतिनिधित्व कानून लागू नहीं—अदालत
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सांसद पद और चुनाव लड़ने की पात्रता को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में अफजाल अंसारी प्रकरण का हवाला देते हुए तर्क दिया गया था कि जब तक राहुल गांधी के विरुद्ध सूरत कोर्ट का दोषसिद्धि आदेश लंबित है, तब तक उन्हें चुनाव लड़ने से रोका जाना चाहिए। अदालत ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि शीर्ष अदालत द्वारा दोषसिद्धि पर रोक लगाए जाने के बाद जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 8(3) स्वतः प्रभावहीन हो जाती है।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने अधिवक्ता अशोक पांडेय की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का स्थगन आदेश निर्णायक है। अदालत के अनुसार, जब दोषसिद्धि पर रोक लगी हुई है, तब उम्मीदवार को अयोग्य ठहराने का कोई आधार नहीं बचता और न ही चुनाव लड़ने पर बाधा मानी जाती है।
याची का कहना था कि सूरत की अदालत ने राहुल गांधी को दो वर्ष की सजा सुनाई थी, और हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने से पहले इनकार कर दिया था। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने दोषसिद्धि को स्थगित कर दिया लेकिन चुनाव लड़ने की योग्यता पर कुछ नहीं कहा। याची के अनुसार, इसी बिंदु को स्पष्ट करने की आवश्यकता है, जैसा कि अफजाल अंसारी मामले में किया गया था।
खंडपीठ ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(3) केवल तभी लागू होती है जब दोषसिद्धि प्रभावी रहे। दोषसिद्धि पर रोक लगते ही यह प्रावधान निष्प्रभावी हो जाता है और संबंधित व्यक्ति चुनाव लड़ने का पात्र बना रहता है। अदालत ने कहा कि सिर्फ जमानत मिलने की स्थिति में धारा 8(2) प्रभावी रहती है, लेकिन दोषसिद्धि के निलंबन पर यह लागू नहीं होती।
अदालत के इस निर्णय के बाद राहुल गांधी की संसदीय पात्रता को लेकर उठ रहे सवालों पर कानूनी स्थिति एक बार फिर स्पष्ट हो गई है।

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