अपराधियों पर पैनी नजर रखने के निर्देश, सीसीटीवी कैमरों से होगी कड़ी निगरानी
शमशाबाद/फर्रुखाबाद: ढाई घाट शमशाबाद (Shamshabad) की पवित्र गंगा नदी के तट पर हर वर्ष माघ माह में लगने वाले ऐतिहासिक रामनगरिया मेले (Ramnagariya fair) को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। मेले के सफल, शांतिपूर्ण और सुरक्षित आयोजन को लेकर गुरुवार को उत्तर प्रदेश पुलिस के अपर पुलिस अधीक्षक ने पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मेला स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मेले की गरिमा बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
ढाई घाट शमशाबाद पर लगने वाला रामनगरिया मेला केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, परंपरा और संस्कृति का जीवंत स्वरूप भी है। माघ माह में आयोजित होने वाले इस मेले में न केवल फर्रुखाबाद, बल्कि आसपास के जनपदों कन्नौज, एटा, इटावा, औरैया, फिरोजाबाद तथा आगरा से भारी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और कल्पवासी पहुंचते हैं। श्रद्धालु गंगा स्नान कर भगवान सूर्य को जल अर्पित करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
निरीक्षण के दौरान अपर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अपराधी प्रवृत्ति के लोगों पर विशेष निगरानी रखी जाए और मेले में किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि भीड़भाड़ वाले इलाकों, स्नान घाटों, मुख्य मार्गों और टेंट क्षेत्रों में जवानों की पर्याप्त तैनाती की जाए।
अपर पुलिस अधीक्षक ने मेले की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए “तीसरी आंख” यानी सीसीटीवी कैमरों का सहारा लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि मेले के प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे हर गतिविधि पर 24 घंटे नजर रखी जा सके। किसी भी प्रकार की लापरवाही या अपराध की स्थिति में दोषियों के खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मेले के सफल आयोजन में जहां एक ओर पुलिस प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालता है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारी, समाजसेवी संस्थाएं, जनप्रतिनिधि तथा नजदीकी ग्राम प्रधान और उनके प्रतिनिधि भी बिजली, पानी, सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं में महत्वपूर्ण सहयोग करते हैं। मेला लगभग एक महीने तक चलता है, जिसमें अनेक धर्मार्थ संस्थाएं अपने-अपने टेंट लगाकर साधु-संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं की सेवा करती हैं। इस दौरान गरीब, मजदूर, असहाय, दिव्यांग और बुजुर्गों को भोजन कराकर उनसे आशीर्वाद लिया जाता है।
जानकारों के अनुसार माघ माह आरंभ होने से लगभग 15 दिन पूर्व ही साधु-संत, कल्पवासी और श्रद्धालु अपना-अपना डेरा जमाने लगते हैं। धीरे-धीरे मेला परवान चढ़ने लगता है और श्रद्धालुओं की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जाती है। इसी को देखते हुए प्रशासन पहले से ही सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर नजर आ रहा है।
हालांकि रामनगरिया मेले के आयोजन में अभी कुछ समय शेष है, लेकिन प्रारंभिक निरीक्षण से यह साफ हो गया है कि प्रशासन किसी भी प्रकार की चूक नहीं चाहता। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अपर पुलिस अधीक्षक के यह निर्देश कितनी सख्ती से जमीन पर उतरते हैं और आगामी दिनों में सुरक्षा व अन्य व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी साबित होती हैं। फिलहाल श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों को प्रशासन से बेहतर और सुरक्षित मेले की पूरी उम्मीद है।


