– सनातन धर्म रक्षापीठ वृंदावन की याचिका पर प्रयागराज हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, 18 दिसंबर अगली तिथि
प्रयागराज/वृंदावन: वृंदावन के विख्यात संत ब्रह्मलीन प्रज्ञाचक्षु संत स्वामी शरणानंद के आश्रम मानव सेवा संघ पर अवैध कब्जे के आरोपों से जुड़ा मामला अब उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना (Finance Minister Suresh Khanna) तक पहुँच गया है। आरोप है कि मंत्री ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर आरोपियों को बचाने के लिए जाँच को प्रभावित किया। इसी आरोप के आधार पर सनातन धर्म रक्षापीठ वृंदावन की याचिका पर हाईकोर्ट प्रयागराज में सुनवाई हुई।
वादी पक्ष का आरोप है कि कुछ व्यक्तियों ने फर्जी वसीयत तैयार कर स्वामी शरणानंद के आश्रम पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। इस प्रकरण में जाँच जारी थी, लेकिन वित्त मंत्री सुरेश खन्ना पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद और प्रभाव का उपयोग कर जाँच को भटकाने और आरोपियों को संरक्षण प्रदान किया।
इससे पहले मथुरा की एमपी-एमएलए कोर्ट में सनातन धर्म रक्षापीठ वृंदावन के पीठाधीश्वर कथावाचक कौशल किशोर ठाकुर ने वित्त मंत्री के खिलाफ याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान वादी ने आरोप लगाया था कि—मंत्री द्वारा भेजे गए लोगों ने उन्हें धमकाया,कोर्ट में भी जान से मारने का प्रयास किया गया था।वादी का आरोप है कि भारी दबाव के चलते अदालत ने याचिका को “क्षेत्राधिकार” का हवाला देते हुए खारिज कर दिया।
न्याय न मिलने पर वादी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।वादी के अधिवक्ता, पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष ठाकुर किशन सिंह और सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता रीना एन. सिंह ने साक्ष्यों के आधार पर FIR दर्ज कराने की अपील की।
अब वादी की ओर से हाईकोर्ट अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार सिंह ने मथुरा एमपी-एमएलए कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में रिवीजन याचिका दाखिल की है।
गुरुवार को जस्टिस समीर जैन की अदालत में मामले की सुनवाई हुई।इस दौरानवित्त मंत्री सुरेश खन्ना के अधिवक्ता उपस्थित रहे।सह-प्रतिवादी निर्विकार सिंघल के अधिवक्ता भी हाज़िर हुए,राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने पैरवी की,
वादी की ओर से आरोप दोहराए गए कि मंत्री ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर धमकाने आदि के प्रयास किए थे।हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई की तारीख 18 दिसंबर निर्धारित की है।मामले को लेकर संत समाज और धार्मिक संगठनों में विशेष रुचि बनी हुई है और सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं।


