जनवरी और फरवरी में भारी सर्दी का अंदाजा लगा रहे मौसम विशेषज्ञ
फर्रुखाबाद। दिसंबर की शुरुआत के साथ ही सर्दी ने दस्तक दे दी है। बीते दो दिनों से सुबह–शाम बढ़ती ठिठुरन यह संकेत दे रही है कि अब मौसम धीरे-धीरे करवट ले चुका है। हालांकि इस बार ठंड का असर सामान्य से देर में महसूस हो रहा है, लेकिन मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि देर से आने वाली सर्दी अक्सर लंबे समय तक और ज्यादा कड़ाके की पड़ती है।
मौसम एवं जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब स्पष्ट दिखने लगे हैं। आमतौर पर दिसंबर की शुरुआत में दिनभर शीतलहर का असर रहता था, लेकिन इस बार दोपहर का मौसम सितंबर-अक्टूबर जैसा गर्म दिखाई दे रहा है। वहीं शाम ढलते ही अचानक तापमान में गिरावट और हल्के कोहरे ने संक्रमण बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। यही कारण है कि घर-घर में सर्दी, जुकाम और बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं।
तेज धूप और रात की ठिठुरन शरीर के ताप संतुलन को बिगाड़ रही है, जिससे खांसी-जुकाम आम होता जा रहा है। कई स्थानों पर लोग शाम को अलाव तापते नजर आने लगे हैं, जबकि सामान्यतः दिसंबर के इस समय तक पूरे दिन ठंड का असर दिखाई देता था। ठंडी हवाओं और तापमान में गिरावट ने धीरे-धीरे शीत ऋतु के चरम की ओर इशारा कर दिया है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यदि सर्दी देर से बढ़ना शुरू होती है, तो यह अधिक समय तक बनी रहती है। इसी आधार पर विशेषज्ञों का अनुमान है कि जनवरी और फरवरी में इस बार भारी सर्दी देखने को मिल सकती है। दिसंबर के आखिरी सप्ताह से ही ठंड का प्रकोप बढ़ने की पूरी संभावना जताई जा रही है। कई राज्यों में भी इसी तरह के मौसम रुझान देखने को मिल रहे हैं, जो आने वाली कड़ाके की ठंड का संकेत हैं।
उधर बुजुर्गों का कहना है कि पहले जैसी कपकपाती सर्दी अब नहीं पड़ती, और इसका बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन तथा बढ़ते संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग है। उनका मानना है कि बदलती जीवनशैली और पर्यावरण में हो रहा निरंतर परिवर्तन अब ऋतुओं को भी प्रभावित कर रहा है। बावजूद इसके, इस साल ठंड देर से ही सही, मगर तीखी पड़ने के पूरे आसार हैं।






