फर्रुखाबाद। आवास विकास कॉलोनी के पार्क, जिन्हें बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने के उद्देश्य से विकसित किया गया था, आज अराजकता और लापरवाही के प्रतीक बन चुके हैं। इन पार्कों की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि स्थानीय निवासी खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। बार–बार की शिकायतों के बावजूद नगर पालिका और आवास विकास परिषद की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है।
कॉलोनी के अधिकांश पार्कों में न तो सफाई की व्यवस्था है, न ही नियमित मेंटेनेंस। कई जगह पार्कों के फाटक टूटे पड़े हैं, जिसकी वजह से आवारा गोवंश आसानी से अंदर घुसकर घंटों डेरा जमाए रहते हैं। वहीं, जहां पार्क खाली पड़े हैं, वहां घास इतनी ऊंची हो चुकी है कि बच्चों का खेलना तो दूर, किसी का बैठना तक मुश्किल है। कुछ पार्क तो आसपास के घरों द्वारा निजी तबेलों में बदल दिए गए हैं, जहां पालतू जानवर बांधे जाते हैं और गोबर से पूरा परिसर दूषित रहता है।
इन पार्कों में अराजक तत्वों की मौजूदगी भी बड़ी समस्या है। कई स्थानों पर शराबियों के जमावड़े और जुआ खेलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। शाम ढलते ही ये जगहें बच्चों और परिवारों के लिए बिल्कुल असुरक्षित हो जाती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शराबियों के शोर और गाली–गलौज के चलते कई बार पुलिस को सूचना दी गई, मगर कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
निकट भविष्य में 14 नवंबर को बाल दिवस है, और सेंट जेवियर्स स्कूल के पास स्थित पार्क में हर साल बच्चों के कार्यक्रम होते हैं। लेकिन इस बार पार्क की बदहाली ने कार्यक्रम की संभावनाओं पर ही पानी फेर दिया है। यहां सफाई नहीं हुई है, आवारा गोवंश का डेरा है और फर्श जगह-जगह टूटा हुआ है। ऐसे में बच्चों का किसी भी प्रकार का आयोजन करना जोखिम भरा साबित हो सकता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पार्कों को सुंदरीकरण, नियमित सफाई, सुरक्षा और प्रकाश व्यवस्था की सख्त जरूरत है। जब तक नगर पालिका और आवास विकास परिषद इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाते, तब तक बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने का सपना अधूरा ही रहेगा। नागरिकों ने स्पष्ट कहा है कि इन पार्कों को फिर से सुरक्षित और उपयोगी बनाने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि ये जगहें अराजक तत्वों और आवारा जानवरों के अड्डों से मुक्त हो सकें।





