ऑक्सीजन मास्क पहनकर सांसदों ने जताई नाराज़गी ,मौसम का मज़ा लीजिए बयान पर तीखा तंज
बढ़ते वायु प्रदूषण पर संसद से सड़क तक संगठित विरोध, विपक्ष बोला “राजधानी गैस चैंबर में बदल रही है”
नई दिल्ली| दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के कई बड़े शहरों में लगातार गिरती वायु गुणवत्ता ने एक बार फिर जनजीवन को संकट में डाल दिया है। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर आज संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया। मकर द्वार के सामने आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में सांसदों ने ऑक्सीजन मास्क पहनकर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास किया। उनके हाथों में एक बड़ा बैनर था, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर कटाक्ष करते हुए लिखा था मौसम का मज़ा लीजिए।
शीतकालीन सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री ने मीडिया से बातचीत में ‘मौसम का मज़ा लीजिए’ कहा था, जिसे विपक्ष ने दिल्ली की जहरीली हवा से जोड़कर सरकार की निष्क्रियता पर तंज के रूप में लिया है।
सोनिया–खरगे–प्रियंका की अगुवाई में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद रहीं। सभी नेता संसद भवन के बाहर एकत्र हुए और हाथों में ‘दिल्ली की हवा क्यों ज़हरीली’ तथा ‘जनता को ऑक्सीजन चाहिए, बयान नहीं’ जैसे नारे लिखे पोस्टर लिए खड़े रहे।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि विपक्ष सिर्फ आलोचना नहीं कर रहा, बल्कि सरकार का ध्यान एक बेहद गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की ओर आकर्षित कर रहा है। उन्होंने कहा हर साल हवा जहरीली होती है, हर साल बच्चे बीमार पड़ते हैं, और हर साल सरकार कहती है कि इस बार विशेष उपाय किए जाएंगे, लेकिन कार्रवाई नदारद रहती है।”
प्रियंका गांधी का तीखा सवाल : “कौन-सा मौसम और कैसा मज़ा
प्रियंका गांधी ने दिल्ली की खराब हवा पर कहा कौन-सा मौसम और कैसा मज़ा,दिल्ली में बच्चे मास्क पहनकर स्कूल जा रहे हैं, बुज़ुर्गों के फेफड़े दर्द कर रहे हैं। हवा इतनी गंदी है कि 10 मिनट बाहर रहना मुश्किल हो जाता है। यह सिर्फ राजनीतिक सवाल नहीं है, यह जनजीवन, स्वास्थ्य और भविष्य का सवाल है।”उन्होंने कहा कि साल दर साल हालात बदतर होते जा रहे हैं और सरकार के पास न कोई प्रभावी योजना है, न कार्रवाई का रोडमैप।
लोकसभा में प्रदूषण पर तुरंत बहस की मांग तीन सांसदों का स्थगन प्रस्ताव
दिल्ली और एनसीआर में लगातार बढ़ते प्रदूषण पर संसद में चर्चा कराने की मांग को लेकर कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर, मनीष तिवारी और विजय कुमार ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव दिया है।
आज सुबह दिल्ली की एयर क्वालिटी खराब श्रेणी में थी एक्यूआई 299 दर्ज किया गया, जो सांस संबंधी गंभीर समस्याओं का संकेत देता है। विशेषज्ञों के अनुसार AQI का स्तर 300 के करीब पहुंचना ही अत्यंत चिंताजनक स्थिति मानी जाती है।
रुपया गिर रहा, अर्थव्यवस्था डगमगा रही” खरगे ने सरकार को घेरा
मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा डॉलर के मुकाबले रुपया जिस तरह गिरा है, वह देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति को उजागर करता है। सरकार कहती है कि विकास हो रहा है, लेकिन आर्थिक संकेतक कुछ और कहते हैं। रुपये की गिरावट जनता पर सीधा बोझ बढ़ाती है।उन्होंने कहा कि सरकार को वायु प्रदूषण और आर्थिक चुनौतियों दोनों पर तुरंत और ठोस कदम उठाने चाहिए।
राष्ट्रीय एयरलाइन के अभाव पर CPI सांसद की चिंता,हम निजी कंपनियों के भरोसे हैं
भाकपा सांसद पी. संतोष कुमार ने विमानन क्षेत्र में बिगड़ती स्थिति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा
इंडिया की विमानन कंपनियों में शिकायतें बढ़ रही हैं देरी, गलतफहमी, उड़ान रद्द होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हमारे पास कोई राष्ट्रीय एयरलाइन नहीं है, इसलिए हम पूरी तरह निजी कंपनियों पर निर्भर हैं। सरकार को इसमें तुरंत दखल देना चाहिए।
लोकसभा में आज सरकार पेश करेगी ‘स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025
संसद के चौथे दिन आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025 पेश करेंगी।इस विधेयक का मकसद राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े खर्चों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना और मशीनों व प्रक्रियाओं पर उपकर (सेस) लगाने की व्यवस्था करना है।
दो दिन हंगामे की भेंट, अब प्रदूषण पर आक्रामक विपक्ष से बढ़ी हलचल
शीतकालीन सत्र के पहले दो दिन भारी हंगामा हुआ, तीसरे दिन कार्यवाही सामान्य रही। लेकिन आज विपक्ष के आक्रामक प्रदर्शन से संसद परिसर में हलचल बढ़ी हुई है।
विपक्ष का कहना है कि जनता खतरनाक हवा में सांस ले रही है और संसद का कर्तव्य है कि इस पर तत्काल और संपूर्ण चर्चा हो।
देश की राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण पर आज का यह प्रदर्शन आने वाले दिनों में राजनीतिक तापमान और भी बढ़ा सकता है।





