– अटल बिहारी वाजपेयी के साथ रहे थे सांसद
– जनसंघ के स्वर्णिम संघर्षकाल के दो आवाज़ों में एक थे दयाराम शाक्य
फर्रुखाबाद।जनसंघ व भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता, पूर्व सांसद एवं पूर्व विधायक स्वर्गीय दयाराम शाक्य की पुण्यतिथि पर जिलेभर में श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन हो रहा है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता ने उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए उनके योगदान को याद किया।
स्व. दयाराम शाक्य वह नाम हैं जिन्होंने भारतीय राजनीति के उस दौर को करीब से जिया जब जनसंघ संघर्ष के पत्थर पर खड़ा था और पूरे देश में इसके सिर्फ दो ही सांसद होते थे, अटल बिहारी वाजपेयी, दयाराम शाक्य दोनों ने साथ मिलकर संसद में राष्ट्रवादी राजनीति की प्रभावी आवाज बुलंद की। पिछड़े वर्ग के होने के कारण श्री साथ को सरकार में जगह नहीं मिल सकी थी जबकि पंडित अटल बिहारी वाजपेई कुछ पदों पर आसींन रहे।दयाराम शाक्य ने न केवल जनसंघ के आदर्शों को मजबूत किया, बल्कि फर्रुखाबाद लोकसभा क्षेत्र को राष्ट्रीय पहचान भी दिलाई।
दयाराम शाक्य अपनी सरलता, विचारधारा के प्रति निष्ठा और जनता के बीच लगातार उपस्थिति के लिए जाने जाते थे। उनके कार्यकाल में विकास और जनसंपर्क हमेशा प्रमुख रहा। फर्रुखाबाद के लोगों का मानना है कि दयाराम शाक्य जैसा नेतृत्व दुर्लभ होता है।
दयाराम शाक्य की राजनीतिक विरासत को उनके पुत्र सुशील शाक्य आगे बढ़ा रहे हैं, जो आज भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश के प्रमुख नेताओं में शुमार हैं।
सुशील शाक्य फिलहाल अमृतपुर विधानसभा से लगातार तीसरी बार विधायक निर्वाचित होकर क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनकी लोकप्रियता और संगठनात्मक पकड़ उन्हें प्रदेश के प्रभावी नेताओं की श्रेणी में रखती है। मैं साफ सुथरी छवि और ईमानदार कर प्रणाली के लिए जाने जाते हैं श्री शाक्य की तीसरी पीढ़ी में उनके पोते संदीप कुमार शाक्य भी निरंतर राजनीति में आगे बढ़ रहे हैं
पुण्यतिथि के अवसर पर लोगों ने कहा कि दयाराम शाक्य की विचारधारा, त्याग और जनसेवा का मार्ग वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। उपस्थित लोगों ने उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।





