तहसील अदालतों में लटक रहे मुकदमे अब नहीं चलेंगे: हाईकोर्ट

0
35

लखनऊ। तहसीलों में मुकदमों की सुनवाई में लगातार बढ़ती देरी पर उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। न्यायालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि राजस्व अधिकारी सुनवाई में अनावश्यक विलंब करते पाए गए, तो उन्हें अवमानना के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराया जाएगा।उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि किसी तहसील में मुकदमे की सुनवाई बार एसोसिएशन की हड़ताल के कारण बाधित होती है, तो संबंधित बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों पर भी अवमानना का मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। न्यायालय ने इसे न्याय प्रणाली के साथ समझौता बताते हुए कहा कि न्याय पाने का अधिकार किसी भी याचिकाकर्ता से छीना नहीं जा सकता।
न्यायमूर्ति अरुण सिंह देशवाल की एकलपीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश परशुराम व एक अन्य द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि तहसील स्तर पर उनके राजस्व वादों की सुनवाई महीनों से लंबित है और अधिकारी समय पर पेश न होकर मामले को अनावश्यक रूप से लटका रहे हैं।
मामले में कठोर रुख अपनाते हुए अदालत ने कहा कि समयबद्ध सुनवाई न्याय की बुनियादी शर्त है, और राजस्व अधिकारी यदि इस दायित्व का पालन नहीं करेंगे तो यह न्याय प्रक्रिया में हस्तक्षेप माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि अनावश्यक देरी प्रशासनिक अक्षमता का संकेत है और इसे तुरंत सुधारा जाना होगा।अदालत ने अपने आदेश की प्रति राजस्व परिषद के अध्यक्ष को भेजने का निर्देश दिया है और कहा है कि इसे प्रदेश की सभी तहसीलों में भेजा जाए तथा हर तहसील के नोटिस बोर्ड पर अनिवार्य रूप से चस्पा किया जाए ताकि अधिकारी इसका पालन सुनिश्चित करें।हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद उम्मीद है कि तहसील स्तर पर लंबित राजस्व मुकदमों की सुनवाई में तेजी आएगी और लोगों को समयबद्ध न्याय मिलने का रास्ता साफ होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here