नई दिल्ली| राज्यसभा सांसद रेणुका चौधरी संसद परिसर में अपने पालतू कुत्ते को लेकर पहुंचीं, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में तीखी हलचल मच गई। सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद वह कुत्ते को लेकर परिसर के भीतर चली गईं। इस घटनाक्रम ने संसद की गरिमा, नियमों और सांसदों की मर्यादा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे संसद की परंपराओं के खिलाफ बताया है, जबकि विपक्ष में भी इस कदम को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।
सदन में प्रवेश करते ही मीडिया ने जब उनसे सवाल पूछे, तो रेणुका चौधरी ने अचानक कुत्ते की आवाज निकालते हुए ‘भौ-भौ’ कर दी। उनका यह वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और आलोचकों ने इसे संसद के गरिमामय माहौल का मज़ाक उड़ाने जैसा बताया। सांसद के इस व्यवहार को लेकर संसद सुरक्षा नियमों पर भी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि किसी भी जानवर को परिसर में ले जाना नियमों के विरुद्ध माना जाता है।
रेणुका चौधरी ने अपने कदम का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने “किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर सरकार उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करना चाहती है, तो वह तैयार हैं। अपनी सफाई में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि वे कभी बैलगाड़ी लेकर संसद पहुंचे थे। उन्होंने यह भी कहा कि “हिंदू धर्म में कुत्ते का विशेष महत्व है,” इसलिए इसमें गलत कुछ नहीं है।
हालांकि सरकार का कहना है कि संसद की गरिमा और सुरक्षा प्रोटोकॉल सर्वोपरि हैं और इस तरह के कदम सदन की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाते हैं। कई सांसदों ने मांग की है कि इस घटना की जांच की जाए और आवश्यकता पड़े तो कार्रवाई भी की जाए।






