लखनऊ| प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में तैनात 255 कर्मचारियों को एक बड़ी प्रशासनिक राहत देते हुए पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ देने का अहम और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह वे कर्मचारी हैं जिनकी भर्ती 28 मार्च 2005 से पहले जारी विज्ञापन के आधार पर हुई थी, लेकिन उनकी ज्वाइनिंग तकनीकी कारणों से एक अप्रैल 2005 के बाद हुई थी। लंबे समय से लंबित इस विषय पर कर्मचारियों द्वारा कई बार मांग उठाई जाती रही थी, जिसे अब सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए स्वीकार कर लिया है।
नगर विकास विभाग के विशेष सचिव कल्याण बनर्जी द्वारा जारी विस्तृत शासनादेश में कहा गया है कि ओपीएस का लाभ प्रशासी, राजस्व, लेखा और अभियंत्रण संवर्ग के उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को मिलेगा जिनका चयन 2005 से पहले विज्ञापित अधियाचन के आधार पर हुआ,जिनकी नियुक्ति उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग या अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से की गई,
और जिनकी सेवा अवधि में कभी भी कोई ब्रेक दर्ज नहीं हुआ।शासनादेश जारी होते ही निदेशक स्थानीय नगरीय निकाय अनुज झा ने प्रदेश के सभी नगर निकायों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि पात्र कर्मचारियों की सूची बनाकर उन्हें पुरानी पेंशन योजना में शामिल किया जाए तथा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी न होने दी जाए। संबंधित नगर निकायों को यह भी कहा गया है कि वे सभी कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों की जांच कर आवश्यक दस्तावेज जल्द उपलब्ध कराएं।सरकार के इस फैसले से कर्मचारी संगठनों में खुशी की लहर दौड़ गई है। नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय न केवल कर्मचारियों बल्कि उनके परिवारों को भी जीवनभर की आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन योजना से मिलने वाला स्थायित्व और सुरक्षा कर्मचारी वर्ग के मनोबल को बढ़ाएगा और सेवा में पारदर्शिता तथा दक्षता को प्रोत्साहित करेगा।
प्रदेश भर के नगर निकायों में तैनात कर्मचारी इस फैसले को सरकार की कर्मचारी-हितैषी नीति का बड़ा उदाहरण मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह कदम हजारों परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करेगा और लंबे समय से चली आ रही उनकी चिंता को समाप्त करेगा। सरकार की यह पहल प्रशासनिक सुधारों की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





