चैरिटी की आड़ में जासूसी जाल: नेपाल में आईएसआई का नेटवर्क सक्रिय, दिल्ली धमाके के बाद यूपी-उत्तराखंड में बढ़ी सख्ती

0
39

लखनऊ| चैरिटी और मानवीय सेवा के नाम पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने एक बार फिर नेपाल में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इसका मुख्य उद्देश्य भारत पर दोतरफा नजर रखना, सीमावर्ती जिलों की खुफिया जानकारी जुटाना और जासूसी का स्थानीय नेटवर्क खड़ा करना है। हालिया जांच में सामने आया है कि गोरखपुर, लखनऊ और उत्तराखंड का पिथौरागढ़ सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों की सूची में हैं।

दिल्ली धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, कई महत्वपूर्ण कड़ियां तुर्किए और नेपाल से जुड़ती गईं। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती जिलों में ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की। अब तक पांच संदिग्ध डॉक्टरों पर कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि एक संदिग्ध डॉक्टर अचानक विदेश भाग गया, जिससे शक और गहरा हो गया है।

नवंबर में केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई आईबी रिपोर्ट में भी यह चेतावनी दी गई थी कि चैरिटी के नाम पर सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियां तेज हो गई हैं। 15 नवंबर को बहराइच में पकड़े गए दो संदिग्ध ब्रिटिश नागरिक भी कथित तौर पर चैरिटी के बहाने ही नेपाल आए थे। इनमें पाकिस्तानी मूल का हस्सन अमान सलीम शामिल है, जिसकी पत्नी भी बांग्लादेशी है और नेपाल की यात्रा पहले भी कर चुकी है।

सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी पाया है कि नेपाल में चैरिटी, मेडिकल कैंप, रिसर्च प्रोजेक्ट और सेमिनार के नाम पर पाकिस्तानी नागरिकों की आवाजाही अचानक बढ़ी है। इससे पहले पाकिस्तानी सेना का पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल हबीब भी भारत से सटे लुंबिनी क्षेत्र में चैरिटी के नाम पर सक्रिय रहता था।

आईबी के पूर्व अधिकारी संतोष सिंह के अनुसार यह गतिविधियां सिर्फ मानवीय सेवा तक सीमित नहीं हैं। इनका वास्तविक उद्देश्य है—भारतीय सीमा पर नजर रखना, sensitive क्षेत्रों की सूचनाएं जुटाना और जासूसी नेटवर्क खड़ा करना।

जांच रिपोर्ट के आधार पर एजेंसियां अब पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर और महराजगंज की नेपाल से लगे इलाकों में यह पता लगा रही हैं कि पाकिस्तान और तुर्किए के कौन-कौन लोग बार-बार सेमिनार, फेलोशिप या रिसर्च के नाम पर नेपाल की यात्रा कर रहे हैं।

फंडिंग का स्रोत क्या है? किस संस्था से जुड़ाव है? सीमावर्ती इलाकों में उनकी गतिविधियां कहाँ-कहाँ रहीं? इन सभी बिंदुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। इसी जांच में दो डॉक्टर संदेह के घेरे में आए हैं, जिनमें से एक अचानक दुबई भाग गया, और दिल्ली धमाके के बाद उसकी यह यात्रा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गई है।

भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ती संदिग्ध गतिविधियों के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब हाई अलर्ट मोड में हैं और नेटवर्क को जड़ से पकड़ने की कवायद तेज कर दी गई है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here