लखनऊ| प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची संशोधन कार्य को पारदर्शी, व्यवस्थित और तनावमुक्त बनाने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मतदाता सूची तैयार करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय और मिल चुका है, इसलिए किसी भी स्तर पर अधीनस्थ अधिकारियों, कर्मचारियों और विशेष रूप से बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) पर अनावश्यक मानसिक दबाव बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को यह भी आगाह किया कि किसी भी बीएलओ को लक्ष्य पूर्ति या कार्य प्रगति के नाम पर तनाव में न डाला जाए, क्योंकि दबाव में किया गया कार्य गलतियों की संभावना बढ़ा देता है और इससे निर्वाचन प्रक्रिया की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
नवदीप रिणवा ने कहा कि जिला निर्वाचन अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जिन बीएलओ का काम किसी तकनीकी कारण, क्षेत्रीय परिस्थितियों या अन्य समस्याओं के चलते पीछे रह गया है, उन्हें तुरंत पर्याप्त सहयोग उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने जोर दिया कि फील्ड में काम करने वाले बीएलओ निर्वाचन प्रक्रिया की रीढ़ होते हैं और उन्हें हर संभव सुविधा, सहायता और मार्गदर्शन मिलना जिले के शीर्ष अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आगे निर्देश दिया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले प्रदेश के प्रत्येक पोलिंग बूथ पर बीएलओ और विभिन्न राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) की अनिवार्य रूप से बैठक कराई जाए। इस बैठक में ऐसे सभी मतदाताओं की सूची साझा की जाएगी, जिनके नाम किसी दस्तावेजी कमी, सत्यापन में त्रुटि या अन्य कारणों से ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण मानी गई है ताकि प्रकाशन से पहले ही सभी विवादित, अपूर्ण या लंबित मामलों का समाधान किया जा सके और अंतिम सूची में किसी भी eligible मतदाता का नाम छूटने न पाए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी बीएलओ को क्षेत्र में कठिनाइयाँ आ रही हैं—जैसे दस्तावेज उपलब्ध नहीं होना, घर पर लोगों का न मिलना, भौगोलिक बाधाएँ या तकनीकी समस्याएँ—तो जिला निर्वाचन अधिकारी स्वयं ऐसे मामलों की समीक्षा कर त्वरित सहायता प्रदान करें। उन्होंने जोर दिया कि निर्वाचन प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए अधिकारियों का सहयोगात्मक और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार अत्यंत आवश्यक है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अंत में कहा कि राज्य में मतदाता सूची का यह चरण बेहद महत्वपूर्ण है और हर जिले को यह सुनिश्चित करना होगा कि न तो किसी बीएलओ पर दबाव बने और न ही किसी योग्य मतदाता का नाम सूची में शामिल होने से छूटे। उन्होंने सभी अधिकारियों से संयम, संवेदनशीलता और पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करने की अपील की।




