प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 128वें एपिसोड में जिस व्यापक दृष्टि से देशवासियों को संबोधित किया, उसने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि भारत का विकास केवल सरकारी योजनाओं का परिणाम नहीं, बल्कि जनसहभागिता की सामूहिक शक्ति से उपजा युगांतकारी परिवर्तन है। इस कार्यक्रम में किसानों, युवाओं, स्थानीय उत्पादों और तकनीकी नवाचारों को जिस प्रमुखता से जगह मिली, वह आने वाले भारत की दिशा का संकेत भी है और संकल्प भी।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में अयोध्या राम मंदिर पर धर्मध्वजा आरोहण और 26 नवंबर को मनाए गए संविधान दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि ये दोनों अवसर राष्ट्र की आत्मा को ऊर्जा देने वाले हैं। अयोध्या में ध्वजारोहण हो या संसद के सेंट्रल हॉल में संविधान दिवस कार्यक्रम—दोनों ही घटनाएँ ‘टीम इंडिया’ की शक्ति का प्रतीक हैं। पीएम मोदी का संदेश स्पष्ट था: जब संकल्प सामूहिक हो, तो उपलब्धियाँ इतिहास रचती हैं।
प्रधानमंत्री द्वारा शहद उद्योग में भारत की उपलब्धियों पर विशेष जोर दिया जाना महत्वपूर्ण है। आज देश में शहद उत्पादन 1.5 लाख मीट्रिक टन से अधिक हो चुका है। यह सिर्फ एक कृषि उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार और किसानों की आय में हुए वास्तविक सुधार का प्रमाण है। जम्मू-कश्मीर के सुलाई शहद को मिला GI टैग, और कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ में ग्रामजन्य संस्था का स्थानीय शहद को ब्रांड बनाना—ये उदाहरण बताते हैं कि जब परंपरा नवाचार से मिलती है, तो अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
प्रधानमंत्री का यह कहना बिल्कुल सही है कि “शहद की मिठास अब किसानों की आय में भी मिठास घोल रही है।”
भारत का 357 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का रिकॉर्ड यह सिद्ध करता है कि कृषि क्षेत्र में परिवर्तन अब केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है। पिछले दस वर्षों में 100 मिलियन टन की कुल वृद्धि दिखाती है कि देश के किसान आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का प्रभावी उपयोग कर रहे हैं। यह केवल उत्पादन का आँकड़ा नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
प्रधानमंत्री ने ISRO की ड्रोन प्रतियोगिता का वीडियो साझा करते हुए युवाओं के साहस और प्रतिभा की सराहना की। मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की चुनौती स्वीकार करने और तमाम प्रयासों के बाद सफलता पाने वाली टीमें भारत की वैज्ञानिक क्षमता का संकेत हैं। यह नया भारत है—जहाँ युवा असंभव को संभव बनाने की क्षमता रखते हैं।
पीएम मोदी का यह संदेश कि युवाओं को विज्ञान और नवाचार की दिशा में आगे आना चाहिए, आज की तकनीकी दुनिया की जरूरतों के अनुरूप है।
‘वोकल फॉर लोकल’ को प्रधानमंत्री ने केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जीवनशैली बनाने का आग्रह किया है। G20 सम्मेलन में विदेशी नेताओं को भारतीय स्थानीय उत्पाद भेंट करना भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और कौशल का गर्वपूर्ण प्रदर्शन था। यह संदेश स्पष्ट है कि स्थानीय जब वैश्विक बनता है, तभी आत्मनिर्भरता पूर्णता पाती है।
त्योहारी खरीदारी में भारतीय उत्पादों को मिली प्राथमिकता भी इस बदलाव की बढ़ती स्वीकृति का संकेत है।
प्रधानमंत्री के वक्तव्य की सबसे बड़ी ताकत यह रही कि उन्होंने छोटे किसानों, सीमांत कृषि परिवारों और ग्रामीण स्टार्टअप्स के महत्व को केंद्र में रखा। सहकारी समितियों द्वारा किसानों को मिलने वाले नए अवसर और ग्रामीण स्टार्टअप्स द्वारा स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुँचाना आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ बन रहे हैं।
विशेषज्ञों का यह अनुमान कि भारत आने वाले वर्षों में कृषि और ग्रामोद्योगों का वैश्विक केन्द्र बन सकता है, केवल उम्मीद नहीं—बल्कि बदलते भारत की वास्तविकता है।
प्रधानमंत्री मोदी का ‘मन की बात’ का यह एपिसोड केवल संवाद नहीं, बल्कि राष्ट्र को नई दिशा देने वाला घोषणापत्र है। किसानों की मेहनत, युवाओं की प्रतिभा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती और स्थानीय उत्पादों की प्रतिष्ठा—ये चारों स्तंभ मिलकर आत्मनिर्भर भारत की नींव तैयार कर रहे हैं।
भारत आज जिस मोड़ पर खड़ा है, वहाँ नागरिकों की सहभागिता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। यही संदेश इस कार्यक्रम में बार-बार उभर कर सामने आया—
“जब देश का हर व्यक्ति आत्मनिर्भर बनेगा, तभी भारत आत्मनिर्भर बनेगा।”






