
डॉ विजय गर्ग
हमारा मस्तिष्क ऊपर से अखरोट की गिरी जैसा दिखता है। इसकी उभरी हुई सिलवटें वाली सतह को सेरिब्रल कार्टेक्स कहा जाता है। ज्ञान और स्मृति जैसे अनेक उच्च स्तरीय संज्ञानात्मक कार्य मस्तिष्क के कार्टेक्स से जुड़े हुए हैं। विज्ञानी कार्टेक्स की गहन जांच करके मस्तिष्क की कार्य प्रणाली का अध्ययन करना चाहते हैं। इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के एक दल ने जापान के शक्तिशाली फुगाकू सुपरकंप्यूटर का उपयोग करके चूहे के मस्तिष्क के कार्टेक्स का एक डिजिटल माडल बनाया है। डिजिटल मस्तिष्क एक वास्तविक मस्तिष्क की तरह व्यवहार करता है, जिससे विज्ञानी रोग की प्रगति, तंत्रिका की गतिशीलता और संभावित उपचारों का अध्ययन कर सकते हैं। यह विज्ञानियों को एक आभासी वातावरण में अल्जाइमर या मिर्गी जैसी स्थितियों का पुनर्निर्माण करके मस्तिष्क के काम करने के तरीके का पता लगाने की एक नई विधि प्रदान करता है। वे देख सकते हैं कि क्षति तंत्रिका नेटवर्क के माध्यम से कैसे आगे बढ़ती है। इस माडल से अनुभूति और चेतना से संबंधित प्रक्रियाओं की भी जांच की जा सकती है। यह माडल संरचना और गतिविधि दोनों को दर्शाता है, जिसमें लगभग एक करोड़ स्नायु कोशिकाएं (न्यूरांस), 26 अरब स्नायु कनेक्शन (सिनेप्स) और 86 जुड़े हुए मस्तिष्क क्षेत्र शामिल हैं।
यह उपलब्धि फुगाकू सुपरकंप्यूटर की वजह से संभव हुई है, जो जापान का प्रमुख सिस्टम है। यह दुनिया के सबसे तेज सुपर कंप्यूटरों में गिना जाता है। यह सिस्टम प्रति सेकेंड अरबों गणनाएं करने में सक्षम है। अमेरिका के एलन इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने जापान की इलेक्ट्रो- कम्युनिकेशंस यूनिवर्सिटी और तीन अन्य जापानी संस्थानों की टीमों के साथ मिलकर इस परियोजना को साकार किया। विज्ञानी अब कार्टेक्स के इस माडल का उपयोग यह पता लगाने के लिए कर सकते हैं कि बीमारियां कैसे विकसित होती हैं, मस्तिष्क तरंगें ध्यान को कैसे प्रभावित करती हैं या दौरे मस्तिष्क में कैसे फैलते हैं। पहले, इस तरह के अध्ययनों के लिए वास्तविक जैविक ऊतक की आवश्यकता होती थी और एक समय में केवल एक ही प्रयोग किया जा सकता था। अब शोधकर्ता आभासी स्थान में कई तरह के आइडिया की जांच कर सकते हैं। ये माडल लक्षणों के प्रकट होने से पहले ही तंत्रिका संबंधी विकारों के शुरुआती लक्षणों को उजागर करने में मदद कर सकते हैं और विज्ञानियों को डिजिटल सेटिंग में संभावित उपचारों या चिकित्सा पद्धतियों का मूल्यांकन करने में सक्षम बना सकते हैं।
विज्ञानियों का दीर्घकालिक लक्ष्य संपूर्ण मस्तिष्क माडल बनाना है, जिसमें मानव मस्तिष्क भी शामिल है।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब






