नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में व्यापक सुधार करते हुए 5,673 पुराने सर्कुलर रद्द कर दिए हैं, जो 1944 से लागू थे। इसके साथ ही 9 हजार से ज्यादा सर्कुलरों को समेकित कर 244 नई मास्टर गाइडलाइन जारी की गई हैं। डिप्टी गवर्नर एससी मुर्मू ने बताया कि इस कदम से बैंकों को सभी नियम एक ही जगह उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे संचालन में पारदर्शिता और सरलता बढ़ेगी।
RBI के इस बड़े फैसले के तहत डिजिटल बैंकिंग के लिए 7 नई मास्टर गाइडलाइन भी जारी हुई हैं, जिनका प्रभाव बैंकों के साथ-साथ ग्राहकों पर भी पड़ेगा। सरकारी प्रतिभूतियों से जुड़े लोन के नियमों में बदलाव के चलते गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में निवेश करने वाले ग्राहकों पर भी असर पड़ सकता है।
डिप्टी गवर्नर मुर्मू के अनुसार, हजारों पुराने सर्कुलरों को RBI अधिकारियों ने पुनः अध्ययन कर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा, जिनमें से कई अप्रासंगिक सर्कुलरों को पूरी तरह रद्द कर दिया गया। ये सर्कुलर लगभग 80 वर्ष पुराने थे और मौजूदा बैंकिंग ढांचे में उपयोगी नहीं रह गए थे।
गौरतलब है कि RBI ने अक्टूबर में 238 मास्टर गाइडलाइन का मसौदा जारी किया था। समीक्षा के बाद अब 244 गाइडलाइन अंतिम रूप से शुक्रवार को जारी की गई हैं। बैंकिंग क्षेत्र में इसे अब तक का सबसे बड़ा नियामकीय सरलीकरण माना जा रहा है।




